नोवा नेचर ने किया सबसे बड़ी प्रजाति की छिपकली मॉनिटर लिजर्ड का रेस्क्यू,कचांदूर में एक घर को बनाया था आश्रय स्थल

दुर्ग। ग्राम कचांदूर में मोहम्मद वसीम के यहां कई दिनों से छत के ऊपर बड़ी प्रजाति की छिपकली नजर आ रही थी। इतनी बड़ी कि उन्होंने कभी देखा नहीं था। कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ है जिस वजह से कोई घर के बाहर नहीं निकल रहे घर के सदस्य जब घर के छत पर पहुचे तो उन्हे छिपकली के आकार का जीव दिखाई दिया । नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार को सूचना दी गई मौके में पहुंचे तो वह कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। जब पाइपलाइन में देखा गया तो वह दिखाई दी। नोवा नेचर के सदस्य अजय पाटिल ने बताया कि यह मॉनिटर लिजर्ड जिसे गोह के नाम से जाना जाता है। इसकी पकड़ बहुत मजबूत होती है पाइप लाइन से निकालने में 2 घंटे की मशक्कत के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में सुरक्षित बाहर निकाला गया। वन विभाग दुर्ग के दिशा निर्देश पर इसे इसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया
मॉनिटर लिजर्ड जिसे हम गोह के नाम से जानते हैं यह मुख्य रूप से स्थलीय भागों में रहती है । यह तेज धावक व वृक्ष पर चढ़ने में माहिर होती है। तैराकी में दक्ष गोह जब दौड़ती है तब पूछ ऊपर उठा लेती है गोह खेतों के आसपास ज्यादा दिखाई देते हैं। यह चूहे कीड़े मकोड़े और छोटे जीव इनका भोजन है । यह छिपकली आकार का बड़ा सरीसृप है। इनका शरीर भूरा होता है, छोटे-छोटे शल्को से भरा रहता है इनकी जबान सांप की तरह, पंजे मजबूत, धूम चपटी और शरीर गोल रहता है । इसकी पकड़ बहुत ही मजबूत होती है। इसके बच्चे चटकीले रंग के होते हैं। जिन की पीठ पर बिंदिया पड़ी रहती है। गोह को विसखोपरा के नाम से भी जाना जाता है। लोगो ने भ्रामक भ्रम फैलाया हुआ है कि यह बहुत जहरीला होता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं यह किसी तरह से नुकसान दे नहीं है और ना ही इससे किसी की मृत्यु होती है। इसमें किसी भी तरह का कोई भी जहर नहीं होता। मॉनिटर लिजर्ड गोह वन्य प्राणी अधिनियम के तहत संकटग्रस्त सूची में है। इसे किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने या इसका शिकार करने पर या इनके शरीर के किसी भी अंग का व्यवसाय करने पर कानूनी रूप से कार्यवाही और सजा भी हो सकती है।

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