रायपुर। राजधानी रायपुर में गरीबों को भूख से बचाने कुपोषण और नशामुक्ति अभियान चलाने वाली संस्था आवाम-ए-हिन्द के सदस्यों के ऊपर कल कातिलाना हमला किया गया। संस्था ने 24 घंटे के अंदर आरोपियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग की गई है। कार्रवाई नहीं किये जाने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
संस्था के संस्थापक मो. सज़्ज़ाद खान ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपराध करने वाले और नशीला पदार्थ के सौदागरों का हौसला बढ़ता जा रहा है। इसके चलते सामाजिक कार्य करने वाले भी उनके निशाने पर आ रहे हैं। शुक्रवार 19 फरवरी को नशीले पदार्थ के सौदागरों ने सामाजिक संस्था अवाम-ए-हिन्द के सदस्यों पर हमला बोल दिया। हालांकि संस्था के पदाधिकारियों और संस्थापक मोहम्मद सज्जाद खान की सूझबूझ से कोई अप्रिय घटना नहीं हो सकी। नशीले पदार्थ के सौदागरों ने संस्था के पदाधिकारियों के पूछने पर धारधार हथियार के साथ दौड़ते हुए हमले करने की कोशिश की गई और उन असमाजिक तत्वों द्वारा कहा गया कि वह लोग उनका धंधा खराब कर रहे हैं। इसलिए चेतावनी देने आये हैं। विदित रहे संस्था अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी विगत 26 वर्षों से मानव कल्याण के दिशा मे गरीबों को भूख से बचान कुपोषण और नशामुक्ति अभियान के साथ-साथ स्वास्थ्य,शिक्षा, रोटी, स्वच्छता अभियान जैसे अनेक जनहित एवं सामाजिक कार्यों में लम्बे समय से कार्य कर रही है। हर कार्यक्रम की सम्पूर्ण जानकारी शासन व प्रशासन को कराई जाती है। आखिर राजधानी में कौन सामाजिक संस्था को खत्म करना चाहता है। आखिर कौन है इसका मास्टरमाइंड। संस्था ने तत्काल ऐसे असमाजिक तत्वों के खिलाफ प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रदेश के पुलिस प्रशासन से संस्था की सुरक्षा की मांग करते हुए असमाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई करने की मांग की है।
बता दें सामाजिक संस्था अवाम हिन्द के पदाधिकारी प्रतिदिन गरीब, असहाय और जरुरतमंद लोगों को निशुल्क भोजन का वितरण करते हैं। कभी यह लोग रेलवे स्टेशन परिसर तो कभी फाफाडीह और मेकाहारा अस्पताल के आसपास फुटपाथ पर बैठे लोगों तक निशुल्क भोजन पहुंचाते हैं। शुक्रवार को अवाम ए हिन्द के पदाधिकारियों की टीम दोपहर में मेकहारा गेट के सामने बैठे लोगों के बीच भोजन वितरण कर रहे थे इसी बीच कुछ लोग चाकू लेकर पहुंचे और भोजन वितरण कर रहे लोगों से विवाद करने लगे। उन लोगों ने जब इसकी वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि इससे उनका धंधा प्रभावित हो रहा है इसलिए वह लोग नाराज है। इसकी जानकारी होने पर संस्थापक मोहम्मद सज्जाद पहुंचे और लोगों को किसी तरह से समझाईश देकर अपनी संस्था के पदाधिकारियों को वहां से सुरक्षित ले गये।
