सात समुंदर पार से हजारों मील उड़ान भरते धर्मनगरी डोंगरगढ़ पहुंची विदेशी पक्षी यूरेशियन क्रेन

राजनांदगांव/ छत्तीसगढ़ जैव विविधता से भरपूर हैं। इसका प्रमाण एक बार फिर देखने को मिला। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ क्षेत्र में पहली बार विदेशी पक्षी यूरेशियन क्रेन का झुंड देखने को मिला। सात समुंदर पार से हजारों मिल उड़ान भरने के बाद विदेशी पक्षी यूरेशियन क्रेन इन दिनों धर्मनगरी में अपना डेरा डाले हुए हैं। विदेशी पक्षियों की संख्या करीब 20 है। विदेशी पक्षियों के आने के साथ ही पक्षी विशेषज्ञ इनकी दिनचर्या पर शोध करने में जुट गए हैं।
यूरेशियन क्रेन प्रायः रूस साइबेरिया एवं ठंड प्रदेशों में रहते हैं। ठंड में भारत के उत्त्तर पश्चिम क्षेत्र खासकर राजस्थान-गुजरात में प्रवास करते हैं। यह पक्षी ठंड शुरू होने पर पर प्रवास में आत हैं और गर्मी लगते ही अपने देश लौटने लगते हैं।
सरोवर के पास आराम करते दिखे
धर्मनगरी डोंगरगढ़ क्षेत्र इन दिनों विदेशी पक्षी यूरेशियन क्रेन से गुलजार है। डोंगरगढ़ के पास के एक सरोवर के किनारे कुछ विदेशी पक्षी आराम करते दिखे तो कुछ मछली का शिकार करते नजर आए। सरोवर में अठखेलियां करते पक्षी लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी पक्षियां बड़ी संख्या में भोजन की तलाश में आते हैं।
 एसडीएम अविनाश ने कैमरे में किया कैद
प्रशासनिक अधिकारियों ने विदेशी पक्षियों की झुंड को देख अपने कैमरे में कैद किया। एसडीएम अविनाश भोई, वन विभाग के अधिकरी प्रतीक ठाकुर, धम्मशील गणवीर, शशि कुमार ने विदेशी पक्षियों की फोटों को कैमरे में कैद कर पक्षी विशेषज्ञ रवि नायडू को शेयर किया। पक्षी विशेषज्ञ रवि नायडू ने उक्त पक्षी यूरेशियन क्रेन काे छत्तीसगढ़ में पहली बार देखे जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया यूरेशियन पक्षी की टांग व गर्दन लंबी होती है। ये सफेद व भूरे रंग में पाए जाते हैं। यह एक सामाजिक पक्षी है। आमतौर पर ये पक्षी एक साथ झूंठ में काफी संख्या में इकट्ठे ही रहते हैं। इस पक्षी का रंग स्लेटी हल्का भूरा और सफेद होता है। साथ ही इस पक्षी की गर्दन और गला गहरे स्लेटी रंग के होते है। इसका माथा काला और आंखों के पीछे तक सफेद पट्टी जैसी होती है। पंखों के नीचे काले रंग की धारियां होती है। यह एक सर्वभक्षी सब कुछ खाने वाला जीव पक्षी होता है। यूरेशियन क्रेन ज्यादा समय तक पानी में रहना पसंद करते हैं। खास बात यह है कि ये तेजी से तैरती हुई मछली को एक ही वार में अपने चोंच में दबोच लेते हैं।

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