‘आत्मनिर्भरता’ के आक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल होने के मायने…

0 अजय बोकिल

 मोदी सरकार चाहे तो इस बात का श्रेय ले सकती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले साल देश को दिए गए आत्मनिर्भरता मंत्र को प्रतिष्ठित आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने अपने कोश में शामिल कर लिया है। हालांकि यह डिक्शनरी के नियमित अद्यतनीकरण का हिस्सा है।  प्रधानमंत्री ने इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले  कोरोना काल में महामारी से ‍जूझने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के ऐलान के समय किया था। तब से इस दिशा में कुछ न कुछ सरकार कर रही है। यह साबित करने का प्रयत्न है कि जो हो रहा है या किया जा रहा है, वह भारत को हर दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के लिए है और आत्मनिर्भरता आत्मकेन्द्रित होने से अलग है। केन्द्र सरकार का ताजा बजट भी इसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। हालांकि कुछ लोग आत्मनिर्भरता  को पीएम की जुमला राजनीति का ही नया शोशा मानते हैं। बावजूद इसके आॅक्सफोर्ड डिक्शनरी में इस शब्द का शुमार होना इसलिए अहम है कि जिस मकसद से आत्मनिर्भरता शब्द चलाया गया है, उस भाव का सटीक और समानार्थी शब्द अंग्रेजी में नहीं है ( हो तो अप डेट करें)। इसका कारण यह है कि इस इकलौते शब्द में कई  भाव और आग्रह समाहित हैं, जिसमें राजनीति भी शामिल है।

अंग्रेजी को कोई कितनी भी गाली दे, लेकिन यह सच्चाई है कि दूसरी भाषाअों से शब्द ग्रहण करने और उसे पचा जाने में अंग्रेजी भाषा का तोड़ नहीं है। इसके विपरीत हिंदी में अनेक अंग्रेजी शब्दों का धड़ल्ले से दैनंदिन इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन हम उनके हिंदी में खप जाने की हकीकत को स्वीकार नहीं करना चाहते। अब इसे कारपोरेट जगत की साजिश मानें, अंग्रेजी का दूसरी भाषाअों पर अतिक्रमण का दुस्साहस समझें  या फिर अपनी कमजोरी कि हम अंग्रेजी के पर्यायवाची शब्द तैयार करने में बेहद कमजोर  और लापरवाह हैं। आज अंग्रेजी के शब्द विज्ञान, तकनीकी, फैशन मनोरंजन सहित कई खिड़कियों से हिंदी के भीतर तेजी से घुसते जा रहे हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी के अंग्रेजी भाषा पर अधिकार पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन आजकल वो अपने भाषणों में अंग्रेजी शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते दिखते हैं, जबकि प्रधानमंत्री बनने के बाद के उनके शुरूआती सम्बोधनों में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग यदाकदा सुनाई  देता था। इस बदलाव के दो अर्थ हो सकते हैं या तो वो यह जताना चाहते हैं कि उन्हें भी अंग्रेजी अच्छी आती है या ‍िफर यह संदेश अंग्रेजी से परहेज ठीक नहीं। इसमें उन शुद्धतावादियों के लिए भी मैसेज है, जो अंग्रेजी तो क्या उर्दू के शब्दों से भी किनारा करके चलते हैं। लेकिन ऐसा करना सैद्धांतिक रूप से भले ठीक हो, सहजता और देशकाल के हिसाब से सही नहीं है। भाषा को दुराग्रहों में जकड़ा नहीं जा सकता।

बहरहाल बात आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में हिंदी सहित अन्य भाषाअोंके शब्दों को शामिल करने की। शब्दों के भाषाअोंमें आयात‍िनर्यात के संदर्भ में जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा के प्रो. डाॅ. स्वागत पटेल ने अपने एक शोध निबंध में बताया माने माने भाषाशास्त्री डेविड क्रिस्टल के हवाले से कहा था कि वैश्वीकरण और भारत के विश्व शक्ति बनने की आकांक्षा के चलते हिंग्लिश ही भारत की भावी भाषा होगी। यह भी सच है कि आज हिं‍िग्लशीकरण से न केवल हिंदी बल्कि अन्य भारतीय भाषाएं भी प्रभावित हो रही हैं। हिंदीतर भाषाअों पर तो अंग्रेजी के साथ हिंदी का प्रभाव भी बढ़ रहा है। इसे हर प्रांत की नई पीढ़ी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में बूझा जा सकता है।

कुछ ऐसा ही हाल अंग्रेजी का भी है। डाॅ पटेल के मुताबिक हमे अचरज नहीं होना चाहिए कि कल को ब्रिटिश प्रधानमंत्री अपने भाषण में हिंदी के जुगाड़ और दादागिरी जैसे शब्दों का प्रयोग करते दिखें। क्योंकि ये शब्द भी आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी का हिस्सा बन चुके हैं। यानी अंग्रेजी में स्वीकृत हो चुके हैं। हालांकि शब्दों के इस आयात से वहां भी मूल अंग्रेजी को खतरा महसूस किया जा रहा है। लेकिन दुनिया में ऐसे उदाहरण शायद ही मिलें कि किसी भाषा को फिक्स्ड‍ डिपाॅजिट की तरह जमा कर दिया गया हो और वह नकदी ती तरह चलायमान रह सकी हो। भाषा बहता नीर है। इसलिए एक भाषा से दूसरी भाषा में शब्द आएंगे, जाएंगे। भा‍षाई आग्रहदुराग्रहों के बाद भी यह आदानप्रदान चलता रहेगा। इसे कोई मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता। भाषा को किसी खास शिकंजे  में कस देना बनावटी ज्यादा होता है।  

किस भाषा में कौन से शब्द व्यवह्रत हो रहे हैं, उनकी भाव व्याप्ति और अर्थवत्ता क्या है, इस पर उन देशों और लोगों की गहरी नजर होती है, जो भाषा में हो रहे बदलावो को बदलते समय के संदर्भ में देखते, समझते हैं। इस हिसाब से आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाअों के शब्दों का प्रवेश 17 सदी से ही होता आ रहा है। इसका एक कारण यूरोपीय देशों में भारत और उसकी संस्कृति को लेकर गहरी जिज्ञासा रही है। वे इसे रहस्यों की चमत्कारों  की भूमि मानते थे। लेकिन भारत को जाननेसमझने ( इसमें कुछ दुराग्रह हो सकते हैं) के लिए उन्होंने अकादमिक स्तर पर बहुत काम किया है। उदाहरण के लिए आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस दुनिया का सबसे बड़ा और बहुआयामी भाषा अनुसंधान कार्यक्रम संचालित करती है। यह कार्यक्रम 1857 से चल रहा है। दूसरी भाषा के प्रचलित और अर्थवान शब्दों को उठाने में आॅक्सफोर्ड डिक्शनरी को  कोई संकोच नहीं होता। शायद यही कारण है कि आज अंग्रेजी  में कुल शब्दों की संख्‍या लगभग 2 लाख 73 हजार है, जिसमें प्रचलित शब्द 1लाख 71 हजार तथा अप्रचलित शब्दों की संख्या 47 हजार है। पिछले साल यानी जनवरी 2020 तक आॅक्सफोर्ड  इंग्लिश डिक्शनरी में हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाअों के 384 शब्दों को जगह मिल चुकी थी। आत्म‍निर्भरता उनमें  शायद नवीनतम है। यहां तक कि हिंदी का फंडा’, एकदम और बोले तो जैसे बोलचाल के शब्द भी अंग्रेजी शब्दकोश में जगह पा चुके हैं।

इसके विपरीत अंग्रेजी के हिंदी में आए शब्दों को हिंदी डिक्शनरी में जल्दी जगह नहीं मिलती। इसका एक कारण यह भी है कि हिंदी शब्दकोशो का अद्यतनीकरण बहुत धीमी गति से होता है। जबकि आयातित शब्द बोलचाल की भाषा में बहुत जल्दी अपनी जगह बना लेते हैं। हिंदी शब्दकोश भाषा के बदलाव के साथ तेजी से कदमताल नहीं कर पाते। हिंदी भाषा में करीब 1 लाख 83 हजार शब्द बताए जाते हैं। बीते दो दशकों में हिंदी शब्दकोश को बढ़ाने में विज्ञान और तकनीकी शब्दों का बड़ा योगदान माना जाता है। इनमे अधिकांश वो शब्द हैं, जो सीधे अंग्रेजी से उठा लिए गए हैं। खासकर  कोरोना काल ने हमे कुछ शब्द  जैसे लाॅक डाउन, मास्क, सोशल डिस्टेसिंग आदि अंग्रेजी शब्द दिए हैं, जो ग्रामीण  बोलचाल तक में रच गए हैं।

बेशक, नए शब्दो को अपनाने से कोई भी भाषा भ्रष्ट होने का खतरा तो रहता है, लेकिन नहीं अपनाने से भाषा के खूंटे से बंध जाने का डर भी रहता है। समय ऐसी भाषा को पीछे छोड़कर आगे निकलता जाता है। आॅक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी आत्मनिर्भरता शब्द को शायद इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि  भारत के वर्तमान संदर्भो में इसका अर्थ बहुआयामी है, जो इसके अंग्रेजी पर्याय सेल्फ‍ रिलायंट से कहीं ज्यादा व्यापक अर्थबोध लिए हुए है। जाने माने लेखक बालेन्दु दाधीच ने एक लेख में बताया था कि आॅक्सफोर्ड डिक्शनरी ने कोरोना काल में पिछले साल अप्रैल तक अपने तिमाही अपडेशन में 14 नए शब्दों को शामिल कर लिया था, जब‍कि हम क्वारेंटाइन का कोई सटीक हिंदी पर्याय खोजने में लगे थे। बेशक किसी भी नए शब्द के डिक्शनरी में शामिल  करने के कुछ मापदंड होते हैं, लेकिन इसके साथ किसी शब्द का उद्भव, चलन और उसके व्यापक व्यवहार को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मोदी सरकार का राष्ट्र की आत्मनिर्भरता का आग्रह किस रूप में और किस संकल्प के साथ फलीभूत होगा, होगा भी या नहीं, यह देखने की बात है। क्योंकि ऐसे ध्येय शब्दों को साकार करने के लिए परिश्रम के साथसाथ नै‍तिक बल चाहिए। फिर भी आत्मनिर्भरता का आॅक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल होना कुछ संदेश तो देता ही है।     

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