भाटापारा। 1 फरवरी को केंद्र सरकार द्वारा आम बजट प्रस्तुत किया जाने वाला है। परंतु आम लोगों को इस बार आम बजट से बहुत ज्यादा कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि सरकार इस वर्ष को रोना की आड़ लेकर बजट को बहुत अच्छा नही बना पाएगी । लोगों का मानना है कि सरकार उन पहलुओं को बिल्कुल भी नहीं छुएगी जिससे आम लोगों को राहत मिले। जिस प्रकार अभी सरकार चल रही है उससे लोगों को बजट से ज्यादा उम्मीद नहीं है। जैसा कि अमूमन होता रहा है विलासिता की वस्तुओं पर टैक्स बढ़ सकता है। तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट इत्यादि पर एक्साइज ड्यूटी सरकार बढ़ा सकती है परंतु पेट्रोल डीजल के दामों को कम करने के लिए कोई योजना सरकार पेश नहीं करेगी। देखने को तो आगामी वित्तीय वर्ष में बड़े-बड़े सपने बजट में अवश्य दिखाए जाएंगे परंतु धरातल पर उसका कहीं अता-पता नहीं होगा अब जब कोरोना धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है तो वैसे भी गतिविधियां तेज हो ही रही है तो स्वाभाविक रूप से जीडीपी में वृद्धि होगी ही। आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर खुल सकते हैं जो लगभग बंद हो चुके थे। परंतु सरकार ज्यादा कुछ करेगी ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं है। व्यापार जगत से जुड़े राजेश कुमार ने कहा कि सरकार को ऐसा बजट पेश करना चाहिए कि वह सीधे सीधे हर वर्ग को प्रभावित करें और हर वर्ग लाभान्वित हो सके। परंतु ज्यादातर सरकार ऐसा नहीं करती है। जिसकी वजह से असंतुलन की स्थिति निर्मित हो जाती है। वहीं एक अन्य व्यवसाई दिनेश कुमार ने कहा कि बजट को लेकर सरकार से बहुत उम्मीद नहीं है क्योंकि बीते समय में महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ दिया, उसे सरकार कैसे मैनेज करेगी। यह एक बड़ा सवाल है। गोपाल ने कहा कि सरकार को अब आयकर विभाग को ही समाप्त कर देना चाहिए। अन्य स्रोतों से इसकी भरपाई सरकार को करना चाहिए। संजय ने कहा कि सरकार को आयकर में 10 लाख रुपए तक की छूट देनी चाहिए। धनेश कुमार ने कहा कि व्यापार व्यवसाय की स्थिति दिनोंदिन खराब होती गई है। सरकार को आर्थिक गतिविधि बढ़ाने हेतु विशेष कार्य योजना लानी चाहिए। एक अन्य व्यवसाई बृज किशोर ने कहा कि सरकार को एफबीआई से दूर रहकर वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट, जिओ मार्ट एवं ऑनलाइन बिजनेस को कम करने की पहल करनी चाहिए तभी देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों को रोजगार मिल सकेगा। साथ ही व्यापार व्यवसाय की स्थिति में भी सुधार आएगा। मुकेश कुमार ने कहा कि सरकार दिशाहीन हो चुकी है। सरकार चाहे कैसा भी बजट पेश करे देश की अभी आर्थिक स्थिति 2014 के पहले जैसी नहीं आने वाली है। इसलिए सरकार को गंभीरता के साथ हर वर्ग को लाभ मिल सके और व्यापार-व्यवसाय तथा आर्थिक गतिविधियां तेज हो सके ऐसा बजट पेश करना चाहिए।
आम बजट से आम लोगों को ज्यादा उम्मीद नहीं
