गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की सफलता अब दूर से दिखाई देने लगी है-रविन्द्र चौबे

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के बनने के बाद से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नारा की सफलता अब दूर से दिखाई देने लगी है। यह सफलता सरकार ने जनता के विश्वास पर खरा उतरकर हासिल की है। छत्तीसगढ़ के मूल लोगों के अभिमान की बात हो या स्वाभिमान की श्री बघेल इसका एहसास कराने में सफल रहे है। उक्त बातें मंगलवार को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे ने राज्य सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित प्रेसवार्ता में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहीं।
राजधानी रायपुर स्थित रेडक्रास सोसायटी भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में मंत्री श्री चौबे ने मीडिया को भूपेश सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आते ही मुख्यमंत्री श्री बघेल ने एक नारा दिया था हम गढ़बो नवा छत्तीसगढ़। इस नारा को मिली सफलता अब दूर से भी दिखाई देने लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के उम्मीद पर खरी उतरी भूपेश सरकार पर जिस तरह से लोगों ने विश्वास जताया है कि उसके बाद अब भूपेश है तो भरोसा है का नारा बन गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के लोगों को उनके अभिमान और स्वाभिमान को एहसास कराने में सफल रहे है। जबकि पूर्व भाजपा शासनकाल में छत्तीसगढ़ को शोषण और भ्रष्टाचार का राज बना दिया गया था। लोहा और पानी बेचने का बाजार बना दिया गया था, जिसे भूपेश सरकार ने फिर से संवारने व सजाने काम काम किया है। उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार ने प्रदेश में विकास करने का काम किया है। अपने घोषणा पत्र में किए गए अधिकांश वादों को इन दो वर्षों में पूरा किया है।
श्री चौबे ने कहा कि भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में प्रदेश की अस्मिता की पहचान खत्म होने लगी थी। यहां की संस्कृति व धरोहरों की पहचान विलुप्तता की ओर थी, जिसे हमारी सरकार द्वारा न केवल बचाने का काम किया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर यहां की बोली को पहुंचाया भी है। श्री चौबे ने कहा कि कोविड-19 के चलते जरूर प्रदेश का काम प्रभावित हुआ है, लेकिन एक ओर जहां पूरे देश में आर्थिक, व्यावसायिक गतिविधियां ठप रही, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में परिस्थितियां विपरित रही। कोविड-19 के बावजूद प्रदेश में लोग व्यवसाय करते रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिए मैं यहां की सरकार, शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों, चिकित्सकों व मीडिया कर्मियों को भी बधाई देता हूं कि जिन्होंने कोरोना काल में जवाबदारी से अपना काम किया। सभी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में परिस्थितियां सही रहीं।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोविड-19 हेतु राहत पैकेज के रूप में मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रूपये की राशि घोषित की थी। उक्त राशि में से गरीबों व किसानों को एक रूपये का भी लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए हमारी सरकार ने राजीव गांधी न्याय योजना की शुरूआत की, जिससे कोरोना कॉल की मंदी में भी छत्तीसगढ़ का बाजार गुलजार रहा। उन्होंने कहा कि हमने प्रदेश के किसानों से वादा किया था कि उनका धान 2500 रूपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदेंगे। हमारी सरकार बनने के बाद हमने इस वादे को भी पूरा करना चाहा लेकिन केन्द्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि केन्द्र की तय दर से अधिक कीमत पर राज्य सरकार किसानों से धान खरीदी करती है तो उनका चावल नहीं लिया जाएगा। केन्द्र सरकार की इस शर्त के बावजूद हमने किसानों से 2500 रूपये प्रति क्विंटल में धान खरीदने के लिए न्याय योजना लाया और किसानों से किया वादा हमने पूरा किया।
मंत्री श्री चौबे ने कहा कि भूपेश सरकार ने दो वर्षों में हम गढ़बो नवा छग के संकल्प के साथ काम कर रहे हैंं। राज्य सरकार पिछले दो वर्षों में गांव, गरीब, किसान, मजदूर, वनाश्रितों, महिलाओं, बच्चों, युवाओं सहित प्रदेश के सभी वर्गों के विकास के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए है इनमें प्रदेश के 18 लाख किसानों को 9 हजार करोड़ रूपये अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया गया, जल कर के रूप में 17 लाख किसानों का 244 करोड़ रूपये बकाया माफ किया गया, बस्तर जिले में किसानों की 1764.61 हेक्टेयर अधिग्रहित भूमि वापस दिलायी गई, 19 लाख से अधिक किसानों को 5750 करोड़ रूपए की आदान सहायता चार किश्तों में, तीन किश्तों में 4500 करोड़ रूपये का भुगतान अंतिम किश्त आगामी मार्च महीनें में दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि दो साल में धान बेचने वाले किसानों की संख्या 12.06 लाख से बढ़कर 18.36 लाख हो गई है। धान का पंजीयन रकबा भी 24.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 27.59 लाख हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में 6430 गौठान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 4487 निर्मित हो चुके हैं।  गोधन न्याय योजना के तहत अब एक करोड़ 36 लाख गोबर विक्रेताओं को 59 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। सरकार ने गोठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट की न्यूनतम विक्रय दर को 8 रूपये से बढ़ाकर 10 रूपये कर दिया गया है। प्रदेश में लाख की खेती को कृषि का दर्जा दिया गया है।

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