एक प्रवक्ता की मौतः टीवी पर तैश, तल्खियां और तनाव का सबब  

0 उमेश त्रिवेदी एक टीवी-चैनल के डिबेट के बाद दिल का दौरा पड़ने से कांग्रेस के प्रखर प्रवक्ता राजीव त्यागी की मौत के बाद टीवी...

मध्यप्रदेश: विकास की पूर्णाहुति ‘स्वर्णिम’ होने में है या ‘आत्मनिर्भर’ होने में?

0 अजय बोकिल मध्यप्रदेश अपनी स्थापना के 66 वर्षों में प्रगति के किस मुकाम तक पहुंचा है, जहां तक पहुंचना था, वहां तक पहुंचा है...

गैरवाजिब ‘सत्ता-संघर्ष’ में उभरे ‘लोकतांत्रिक-सवालों’ का निदान जरूरी…

0 उमेश त्रिवेदी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खिंची तलवारें म्यान में लौट जाने के बाद राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के भाजपाई...

 राहत इंदौरी: इतना खरा बोलने वाला शायर फिर रूबरू होगा?

0 उमेश त्रिवेदी पब्लिक स्टेज पर गीतों का सुरूर और गजलों का गरूर पिघल जाने के बाद कवि सम्मेलनों और मुशायरों में जाना तो बरसों...

‘हिंदी थोपने’ की पाॅलिटिक्स के बजाए नए मुददे तलाशें तो बेहतर

0अजय बोकिल यूं तो यह बात दक्षिण भारतीयों पर ‘हिंदी थोपने’ की पालिटिक्स का हिस्सा ही ज्यादा लगती है, लेकिन यह प्रसंग जिस तरह चेन...

राजनीति के समुन्दर में कांग्रेस का टूटा लंगर, लड़खड़ता जहाज

– उमेश त्रिवेदी 1950 में बनी एक हिन्दी फिल्म ’आंखें’ में भरत व्यास का एक गाना काफी लोकप्रिय हुआ था- ’मोरी अटरिया पर कागा बोले,...