कांग्रेस नेता अश्वनी साहू ने सांसद विजय बघेल के अनशन समाप्त करने पर साधा निशाना, कसा तंज

पाटन। दुर्ग सांसद विजय बघेल शराब लूटने वालों के समर्थन में पिछले 5 दिनों से आमरण अनशन कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि जब तक उनके समर्थकों की नि:शर्त रिहाई एवं उन पर लगे धाराएं खत्म नहीं होगी
तब तक वे अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे, लेकिन पांचवे दिन में ऐसा क्या हुआ कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के हाथों से जूस पीकर (खिचड़ी खाकर) अपना अनशन समाप्त किया। क्या खिचड़ी ठीक से पकी नहीं थी।

श्री साहू ने कहा कि शराब लूटने वाले के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व मंत्री, विधायकों का राजभवन जाना क्या राज भवन एवं महामहिम राज्यपाल की गरिमा को कम नहीं किया ? यह विचारणीय प्रश्न है। श्री साहू ने कहा कि- सांसद विजय बघेल को अपने कहे वादों पर अडिग रहना चाहिए था, क्यों झूठी नौटंकी कर खिचड़ी पका रहे थे! सरल शब्दों में कहे तो विजय बघेल का ड्रामा भक्ति रस से शुरुआत होकर हास्य रस में खत्म हुआ। तभी तो भाजपा के राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम भाजपा की ही सभा में भूपेश बघेल जिंदाबाद के नारे लगाए और लगवाएं। मुझे लगता है यही भाजपा मुक्त होने का संकेत है। रामविचार नेताम वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने सोच समझकर लगाए होंगे भूपेश बघेल जिंदाबाद के नारे।
महामहिम राज्यपाल से भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने 3 दिन के अंदर कार्रवाई करने का निवेदन किया था, तो विजय बघेल का अनशन आनन फानन में क्यों समाप्त किया गया। समय का इंतजार करना था। उन्होंने कहा कि पाटन की जनता विजय बघेल से जवाब मांगती है, वे जवाब दें। आखिर क्यों अपने वादे से मुकर गए। अश्वनी साहू ने कहा कि छत्तीसगढ के माटी पुत्र किसानों के हितैषी भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के खिलाफ दुर्भावनापूर्वक ग़लत माहौल बनाने की कोशिश की गई वह घोर निंदनीय है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का हर प्रयास और हर निर्णय छत्तीसगढ़ के किसानों, मजदूरों से लेकर महिलाओं, आदिवासियों, विद्यार्थियों, नवजवानों, आर्थिक रूप पिछड़े, गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों से लेकर अन्य सभी वर्ग के लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए व स्वावलंबी बनाने के साथ ही सतत नवीनतम कार्य योजना बनाकर विकास के लिए है।

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