रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को साकार करते हुए रायपुर जिला प्रशासन की ‘प्रोजेक्ट ग्रीन पालना’ पहल मातृत्व की खुशी को हरियाली के संकल्प से जोड़ रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय के मंशानुरूप चल रहे इस अभिनव प्रयास के तहत शासकीय अस्पतालों में प्रसव के बाद प्रसूता माताओं को फलदार पौधे भेंट किए जा रहे हैं, ताकि एक नई जिंदगी के आगमन के साथ धरती पर एक नए वृक्ष का भी जन्म हो।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में रायपुर जिले में इस अभियान के तहत 30 सितंबर को जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र जैसे शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हीरापुर – 01, एम.सी.एच. कालीबाड़ी – 01, अभनपुर – 01, चंगोराभाठा – 01, तिल्दा – 01, बिरगांव, मोवा – 01 सहित कुल 08 प्रसूता माताओं को 40 फलदार पौधे भेंट किए गए।
अब तक इस योजना के तहत कुल 13,744 प्रसूता माताओं को 68,720 पौधे भेंट किए जा चुके हैं। प्रत्येक माता को 5-5 पौधे दिए जा रहे हैं जिनमें आम, अमरूद, मुनगा (सहजन), पपीता और आंवला जैसे पोषणयुक्त फलदार प्रजातियां शामिल हैं।
समाज के लिए क्यों है यह मॉडल फायदेमंद ?
1. पर्यावरण और स्वास्थ्य का संगम: एक पौधा बड़े होने पर धूल कणों सोखता है और पर्याप्त ऑक्सीजन देता है। यह नवजात के लिए शुद्ध वातावरण की नींव है।
2. कुपोषण के खिलाफ लड़ाई: आम, आंवला, मुनगा और पपीता विटामिन और आयरन से भरपूर हैं। यह पौधे आने वाले वर्षों में परिवार के लिए पोषण की सुरक्षा बनेंगे।
3. भावनात्मक जुड़ाव: माताएं अपने बच्चे के साथ-साथ पौधे को भी बढ़ता देखती हैं। यह “मेरे बच्चे का पेड़” का भाव बच्चे में भी प्रकृति के प्रति प्रेम जगाता है।
4. आर्थिक सशक्तिकरण: 3-4 साल में ये फलदार पेड़ फल देने लगेंगे, जो ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों के लिए अतिरिक्त आय और आहार का साधन बनेंगे।
प्रोजेक्ट ग्रीन पालना सिर्फ पौधा वितरण नहीं, बल्कि यह मातृत्व को सम्मान और प्रकृति को संरक्षण देने की दोहरी सोच है। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और संवेदनशील समाज दोनों का निर्माण कर रहा है।
