कोरोना महामारी का दंश झेल चुके छत्तीसगढ़ में अब स्वाइन फ्लू के बढ़ते संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि आम जनता भी सकते में है। हालांकि इस बीमारी से अभी तक किसी की मृत्यु की खबर नहीं है, लेकिन जिस तरह से संक्रमण में तेजी देखी जा रही है वह स्वास्थ्य विभाग के लिए परीक्षा का समय जरूर है। इस समय प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 298 मरीज हैं। इनमें 127 राजधानी रायपुर से हैं। 81 लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। जबकि 32 लोग होम आइसोलेशन में हैं। सक्रिय मरीजों की संख्या 113 हैं। राजधानी में स्वाइन फ्लू के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री मिली है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतने को कहा है, ताकि यह बीमारी दूसरों में ना फैले। राहत की बात यह है कि स्वाइन फ्लू के वायरस एच1एन1 ने अपना स्वरूप नहीं बदला है। यानी वायरस में कोई म्यूटेशन नहीं हुआ है। वायरस में म्यूटेशन से बीमारी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण तो हैं, लेकिन जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, ऐसे मरीज गंभीर हो रहे हैं। हालांकि वे इलाज के बाद ठीक भी हो रहे हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि संक्रमण के बढ़ते मामलों का मतलब यह नहीं कि प्रदेश में कोई नई महामारी दस्तक दे चुकी है, लेकिन यह जरूर है कि मौसमी संक्रमण सक्रिय है और इसके प्रसार को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। बारिश और मौसम में बदलाव के बीच वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। ऐसे में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीजों की संख्या दर्ज करना नहीं, बल्कि संक्रमण की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखना है। अस्पतालों में जांच, दवाइयों, ऑक्सीजन और आईसीयू जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार से गंभीर मामलों को कम किया जा सकता है। आम लोगों को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़ से दूरी, मास्क और हाथों की स्वच्छता जैसे उपाय अपनाने चाहिए तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं नहीं लेनी चाहिए। फिलहाल जरूरत डर फैलाने की नहीं, बल्कि सतर्कता, समय पर जांच और त्वरित उपचार की है। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को शुरुआती स्तर पर रोकना ही स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इसलिए पहला सवाल यह होना चाहिए कि राज्य में संक्रमण की वास्तविक स्थिति क्या है? कितने संदिग्ध मरीजों की जांच हो रही है? किन जिलों में संक्रमण अधिक है? गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन, आईसीयू और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी उपलब्ध हैं या नहीं? इन सवालों के जवाब जनता के सामने स्पष्ट रूप से आने चाहिए। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है। लोगों को यह समझाना होगा कि बुखार, खांसी और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें, लेकिन हर वायरल बुखार को स्वाइन फ्लू समझकर भयभीत भी न हों। संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना और जरूरत पडऩे पर जांच कराना अधिक समझदारी है। बहरहाल, स्वाइन फ्लू को लेकर न तो अनावश्यक भय पैदा करने की जरूरत है और न ही इसे हल्के में लेने की। आज की सतर्कता कल के संकट को रोक सकती है।
