शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में शिक्षक दिवस पर परिचर्चा सम्पन्न, नैतिक मूल्यों का समावेश किए बिना वर्तमान शिक्षा अधूरी

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रायपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग द्वारा शान्ति सरोवर में शिक्षक दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में कु शाभाऊ  ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार वि.वि. के कुलपति प्रो. मनोज दयाल, कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. श्रीधर अय्यर, इन्दिरा गाँधी कृषि वि.वि के कुलपति डॉ. गिरीश चन्देल, स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एम.के. वर्मा, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने भाग लिया।

अपने सम्बोधन में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि आज गूगल और इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं की बाढ़ आ गई है, लेकिन इससे मन की अशांति भी बढ़ी है। यदि शिक्षक स्वयं शांत नहीं रहेगा तो वह विद्यार्थियों को शांति नहीं दे पाएगा। उन्होंने अशांति को दूर करने के लिए शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे कक्षा की शुरुआत और अंत में विद्यार्थियों को दो मिनट मेडिटेशन के द्वारा ध्यान व चिंतन-मनन करने का अभ्यास कराएं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं बल्कि व्यक्तित्व का रूपांतरण और चरित्र निर्माण करना है। कोरोना काल के बाद ऑनलाइन शिक्षा का चलन बढ़ा है परंतु इसके माध्यम से चरित्र निर्माण और जीवन जीने की कला नहीं सिखा सकते। उन्होंने कृत्रिम बुद्घिमत्ता (एआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमें सूचना तो दे सकते हैं लेकिन विवेक और सही दिशा नहीं दे सकते। इसलिए वास्तविक शिक्षक का कोई विकल्प नहीं है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि वर्तमान में ‘गूगल’ और छ: इंच का मोबाइल फोन एक वैश्विक शिक्षक की तरह काम कर रहा है जिससे बच्चे बिना शिक्षक के भी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। सूचना देना अब आसान है लेकिन उस सूचना का सही उपयोग कैसे किया जाए यह तय करने में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समय के साथ खुद को अपडेट रखना होगा और एआई जैसी तकनीकों को समझना होगा अन्यथा वे बच्चों से डिस्कनेक्ट हो जाएंगे।

कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने कहा कि शिक्षक साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी का निर्माण करने वाले ‘देवदूत’ (एंजिल) होते हैं। भारत की संस्कृति में कण-कण में मूल्य समाए हैं जहाँ नाग पंचमी जैसे त्योहारों पर सांपों की पूजा भी खाद्य चक्र के वैज्ञानिक महत्व को समझकर की जाती है। उन्होंने छात्रों को ‘जेनजी’ या ‘जेन अल्फा’ जैसी पश्चिमी शब्दावलियों में बांटने के प्रयासों को शिक्षा जगत को विभाजित करने की साजिश बताया और इससे सजग रहने की बात कही।

स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मुकेश कुमार वर्मा ने कहा कि महर्षि वशिष्ट, वाल्मीकि, सांदीपनी, चाणक्य, समर्थ रामदास और रामकृष्ण परमहंस जैसे भारत के महान गुरुओं ने समाज को मूल्य-आधारित जीवन की राह दिखाई। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य के भीतर पहले से मौजूद पूर्णता का प्रकटीकरण है। ईश्वर ने सभी को अनेक गुणों से संपन्न बनाया है। शिक्षक का काम बच्चों के भीतर छिपे इन गुणों को पहचानना और उन्हें आचरण में लाना है। आधुनिक युग में सूचना प्रौद्योगिकी इतनी हावी हो चुकी है कि बच्चे आत्मिक और व्यावहारिक ज्ञान से दूर होते जा रहे हैं। शिक्षकों के सामने यह चुनौती है कि वे तकनीक के साथ-साथ मूल्य-आधारित और अध्यात्म-आधारित शिक्षा भी प्रदान करें।

ब्रह्माकुमारीज की रायपुर संचालिका सविता दीदी ने कहा कि आज के युग में अथाह ज्ञान और विकसित विज्ञान होने के बावजूद लोगों के मन में सच्ची शांति और संवेदनाएं गायब हो रही हैं। डिग्रियों और बड़े पदों से अधिक आज दुनिया को ‘अच्छे इंसानों’ की जरूरत है, जो केवल मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों से ही बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा वही है जो मन को श्रेष्ठ और बुद्धि को विवेकशील बनाए। उन्होने कहा कि तकनीक और मोबाइल का उपयोग गलत नहीं है लेकिन हम उसे चलाएं वह हमें नहीं चलाए। इस पर नियंत्रण करने की शक्ति आध्यात्मिक शिक्षा और राजयोग के अभ्यास से ही प्राप्त होती है।

राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी ने कहा कि शिक्षक वह शिल्पकार है जो बच्चों को गढऩे का काम करता है। नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा से हमारी सोच सकारात्मक बनती है। बच्चों को शिक्षा देकर उन्हें अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है।

परिचर्चा का संचालन नवा रायपुर की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया। इस अवसर पर नगर के बाल कलाकारों ने शानदार स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। अन्त में सभा में उपस्थित समस्त शिक्षकों का ब्रह्माकुमारी बहनों ने अभिनन्दन किया।