भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 7 महीने के इंतजार के बाद अपनी टीम की घोषणा कर दी है। 65 पदाधिकारियों की टीम में 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 16 सचिव और 7 मोर्चा अध्यक्ष शामिल हैं। इनमें 12 महिलाएं और 7 अल्पसंख्यक नेताओं को जगह दी गई है। टीम की खास बात यह है कि इसमें 51 नए चेहरे हैं। दरअसल यह सिर्फ नई टीम बनाने की जद्दोजहद नहीं है बल्कि इसके जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि अब नए लोगों को सामने लाने का वक्त आ गया है। पिछले अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम के 6 उपाध्यक्ष, 5 महासचिव और 10 सचिव हटा दिए गए हैं। इस टीम में कोषाध्यक्ष के रूप में पीयूष गोयल को जिम्मेदारी सौंपी गई है, तो उपाध्यक्ष के रूप में संघ का चेहरा माने जाने वाले राम माधव और वसुंधरा राजे सिंधिया को जगह मिली है। वहीं, 2 साल बाद महासचिव के रूप में स्मृति ईरानी की वापसी हुई है। जबकि अच्छे कार्य के चलते सुनील बंसल और विनोद तावड़े महासचिव के पद पर बने रहने में सफल रहे हैं, तो संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रखने वाले संगठन महासचिव बी.एल. संतोष बरकरार रखे गए हैं। उनके साथ शिव प्रसाद और सौदान सिंह को संयुक्त महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नई टीम में छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, तो दीपक महासके को अमित मालवीय की जगह सोशल मीडिया की कमान दी गई है, जो बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नवीन टीम में अनुभव और युवा जोश के साथ क्षेत्रीय और जाति संतुलन को साधने का प्रयास किया गया है। यहां यह बताना लाजिमी है कि वर्ष 2027 में सात राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि पार्टी की नजर चुनाव पर ही रहेगी। खासकर उत्तर प्रदेश का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को महासचिव बनाया गया है। रेखा वर्मा और पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारीक मंजूर उपाध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। अमरपाल मौर्य पिछड़ा वर्ग और कुंवर बासित को अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बनाए गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)फार्मूले की काट के तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक नेताओं को खास तवज्जो दी गई है। इसी तरह, उत्तराखंड, गुजरात, पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों के नेताओं को भी टीम में शामिल किया गया है। गौरतलब है कि भाजपा के पास वर्तमान में संसद में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है। पार्टी के भीतर अन्य अल्पसंख्यक समुदाय (जैसे सिख, इसाई, जैन आदि) से कुछ सांसद या नेता हो सकते हैं। लेकिन मुख्य धारा के मुस्लिम प्रतिनिधित्व के मामले में वर्तमान संसद में भाजपा का कोई भी मुस्लिम सांसद नहीं है। हालांकि पार्टी संगठन और कार्यकारिणी में उन्हें स्थान दिया गया है। इस बार 2 मुस्लिम के साथ 2 ईसाई, 1-1 सिख, जैन और पारसी समुदाय के सदस्य शामिल हैं। टीम में गौर करने वाली बात यह भी है कि 65 सदस्यीय कार्यकारिणी में से 42 पदाधिकारी 60 साल से कम उम्र के हैं। इनमें 6 की उम्र 40 साल से कम है। जबकि 15 नेता 40 से 49 और 21 नेता 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग के हैं। बहरहाल, भाजपा ने युवाओं के साथ पुराने और अनुभवी नेताओं को तवज्जो देकर पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं को भी साधने की कोशिश की है। खासकर वसुंधरा राजे की वापसी इसका संकेत है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग, दलित, महिला और अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने के साथ पार्टी ने चुनावी राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा है। इसका उद्देश्य सत्ता के बजाए संगठन को व्यापक जनाधार वाली पार्टी के रूप में स्थापित करना है। नि: संदेह नितिन नवीन की यह टीम आगामी चुनावों के लिए फौज तैयार करने की कवायद है, लेकिन इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि वह राज्यों में संगठनात्मक एकजुटता, सामाजिक विस्तार और चुनावी नतीजों में कितनी सफल होती है?
नितिन का “नवीन” दांव
