राष्ट्रमंडल खेल और भारत 

राष्ट्रमंडल खेल 2026, वर्ष 2030 में भारत के अहमदाबाद में मिलने के वादे के साथ संपन्न हो गया। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में 23 जुलाई से 2 अगस्त तक चले इस खेल महाकुंभ में भारत सहित 72 देशों के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। भारत के लिए यह खेल महाकुंभ कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उसका प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। 13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक अपने नाम किए और चौथा स्थान हासिल किया। 13 स्वर्ण में से 8 पदक महिलाओं ने जीते हैं। सबसे ज्यादा पदक मुक्केबाजों ने दिलाए। उन्होंने 10 पदक अपने नाम किए, जिसमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे। महिला मुक्केबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 5 स्वर्ण पदक जीते। जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला और इस खेल में देश ने कुल 4 पदक पर कब्जा जमाया। यह पहला मौका रहा जब भारत ने जूडो में दो स्वर्ण पदक जीते। भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर मीराबाई चानू ने इतिहास रचा। वह लगातार तीन राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बनीं। छत्तीसगढ़ के लिए भी यह खेल महाकुंभ गौरान्वित करने वाला रहा। यहां की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीत कर इतिहास रचा है। वैसे, पहली नजर में भारत का 39 पदक जीतना निराशाजनक लग सकता है, क्योंकि 1998 के बाद पहली बार भारत 50 पदकों का आंकड़ा नहीं छू सका, लेकिन यदि इन खेलों की परिस्थितियों और प्रतियोगिताओं की संख्या को देखा जाए तो यह अभियान भारत के राष्ट्रमंडल खेल इतिहास के सबसे सफल प्रदर्शनों में से एक माना जाएगा।दरअसल, ग्लास्गो में वित्तीय कारणों से खेलों की संख्या घटाकर केवल 10 कर दी गई। इसके चलते कई ऐसे खेलों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया, जो वर्षों से भारत के लिए सबसे अधिक पदक दिलाने वाले खेल रहे हैं। इनमें निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी शामिल हैं। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। भारतीय दल ने अब तक आयोजित अधिकांश संस्करणों में हिस्सा लिया है। केवल 1930, 1950, 1962 और 1986 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने भाग नहीं लिया। भारत ने पहली बार 1934 में लंदन में आयोजित तब के ब्रिटिश एम्पायर गेम्स (वर्तमान राष्ट्रमंडल खेल) में हिस्सा लिया था। आजादी के बाद पहली बार भारत ने 1954 में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया था। 1966 में पहली बार पदकों की संख्या ने 10 को पार किया। भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रमंडल अभियान 2010 में नई दिल्ली में आयोजित खेलों में देखने को मिला। मेजबान भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया। यह आज भी राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। साल 2000 के बाद से भारत लगातार राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में शीर्ष पांच देशों में शामिल रहा है। बहरहाल, इस खेल महाकुंभ ने फिर यह साबित किया कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच मित्रता, सांस्कृतिक संवाद और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भी सशक्त मंच हैं। भारतीय खिलाड़ियों की सफलता बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में खेल अवसंरचना, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को मिलने वाले संस्थागत सहयोग का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। हालांकि यह भी सच है कि कुछ खेलों में भारत को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभी भी खेल प्रबंधन के क्षेत्र में सुधार की गुंजाइश है।अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निरंतर सफलता तभी संभव है जब जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। ग्रामीण और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। साथ ही खिलाड़ियों के लिए दीर्घकालिक नीति बने। लक्ष्य केवल पदकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को विश्व खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। यदि वर्तमान गति को सही दिशा और निरंतरता मिलती है, तो आने वाले ओलंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत और अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकता है।