स्वाभिमान और उद्यमशीलता की मिसाल है सिंधी समाज: डेका

*राज्यपाल ‘मुखी संवाद’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल*

रायपुर/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि सिंधी समाज स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। विभाजन की विभीषिका और विस्थापन की पीड़ा को सहते हुए इस समाज ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प से न केवल स्वयं को पुनः स्थापित किया, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सिंधी समाज की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की गाथा पूरे भारतवर्ष के लिए गौरव का विषय है।

राज्यपाल श्री डेका आज रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित ‘मुखी संवाद’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। ‘विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा’ के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के प्रतिनिधियों के बीच संवाद और विचारों का आदान-प्रदान सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

राज्यपाल ने कहा कि देश के विभाजन के समय सिंधी समाज को अपनी मातृभूमि, संपत्ति तथा सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को छोड़कर देश के विभिन्न हिस्सों में बसना पड़ा। उस असीम वेदना और संघर्ष को इस समाज ने अपनी शक्ति बनाया और नए सिरे से जीवन का निर्माण किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय स्थान बनाया है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की रीढ़ उसकी पंचायतें होती हैं। पंचायतों के पदाधिकारी जब समाजहित में सेवाभाव और समर्पण के साथ कार्य करते हैं तो समाज की जड़ें और अधिक मजबूत होती हैं। सिंधी समाज की पंचायत व्यवस्था की विशेषता यह है कि वह सामाजिक समरसता बनाए रखने के साथ समाज को संगठित और नई दिशा देने का कार्य करती है।

श्री डेका ने कहा कि सिंधी पंचायतें केवल परंपराओं के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समय के अनुरूप बदलाव को स्वीकार करने वाली प्रगतिशील संस्थाएं भी हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘मुखी संवाद’ में प्रदेशभर की 128 पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। यह एकजुटता और समर्पण समाज की संगठनात्मक शक्ति को और सुदृढ़ करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव अनेकता में एकता की भावना को साकार करती रही है। प्रदेश के विकास में सिंधी समाज ने अपनी मेहनत, ईमानदारी, उद्यमशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे सिंधी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। विशेष रूप से बच्चों और युवा पीढ़ी को अपनी भाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने महिला विंग के माध्यम से समाज की महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने और उन्हें और अधिक सशक्त बनाने पर भी जोर दिया।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि संवाद से नए विचार सामने आते हैं और समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से समाज की बेहतरी के लिए अपने विचार, तर्क और सुझाव खुलकर साझा करने का आग्रह किया।

राज्यपाल ने पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत को ‘मुखी संवाद’ के आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पंचायतों के मुखी एवं प्रतिनिधि, महिला विंग के सदस्य तथा बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।