दिमनी में किसके आंगन में जलेगा जीत का दीया?

अरुण पटेल

मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार गिर्राज दंडोतिया ही होंगे केवल औपचारिक घोषणा होना शेष है। कांग्रेस ने रवींद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बनाया है। इस क्षेत्र में दंडोतिया और तोमर आमने सामने होंगे तो अभी बसपा उम्मीदवार का नाम सामने आने का इंतजार है। बसपा ने सभी क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की घोषणा की है लेकिन अभी यहां कौन उम्मीदवार होगा इसका फैसला नहीं किया है। बसपा का संभावित उम्मीदवार चुनाव त्रिकोणीय बना पाता है या फिर चुनावी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच होगी तथा बसपा उम्मीदवार वोट कटवा साबित होगा या फिर चुनाव परिणाम प्रभावित करने वाला होगा, यह बात नतीजों से ही पता चल सकेगी। फिलहाल तो अभी बसपा की घोषणा का इंतजार है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों ने अपनी चुनावी जमावट आरंभ कर दी है। लगभग चार दशक बाद मुरैना जिले से मंत्रिमंडल में दो चेहरे एक साथ जगह पाने में सफल रहे हैं। दोनों ही चेहरे इस समय विधायक नहीं हैं क्योंकि दल बदलने के कारण उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और अपने मंत्री पद बचाए रखने के लिए उन्हें उपचुनाव में जीत दर्ज कराना जरूरी है। विधायक बनने पर ही मंत्री बने रह सकते हैं। इस कारण दंडोतिया चाहेंगे कि हर हाल में चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे और पद पर बने रहें। इसलिए चुनाव जीतना उनकी नाक का सवाल बन गया है और वह वह एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। दंडोतिया 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के सम्मान में उन्होंने भी विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और बाद में शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री शामिल कर लिए गए। दंडोतिया अब भाजपा नेता बन गए हैं और उन्हें चुनाव जिताना ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है तो वहीं दंडोतिया के लिए जरूरी है कि वह उपचुनाव जीतकर सिंधिया के सम्मान की रक्षा करें। कांग्रेस उम्मीदवार रवीन्द्र सिंह तोमर 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार के रूप में और 2013 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं और अब फिर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे हैं। अब यह तो बाद में ही पता चलेगा कि दो बार विधानसभा जाने की गाड़ी चूक चुके तोमर की किस्मत क्या उनकी चाहत को पूरा कर पाएगी? दंडोतिया सिंधिया समर्थकों में प्रमुख ब्राह्मण चेहरा हैं। यदि दंडोतिया चुनाव जीत जाते हैं तो यह दोनों के लिए राजनीतिक फायदे का सौदा होगा। जहां तक कांग्रेस उम्मीदवार तोमर का सवाल है उनके नाम की घोषणा होने के पहले और बाद में भी स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने जो टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे के समर्थकों ने विरोध किया। उनके पुतले का दहन कर कतिपय कांग्रेसियों ने विरोध जताया और अपनी भावनाएं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंचा दी हैं। कांग्रेस यहां डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है। पहले माना जा रहा था की भाजपा के दंडोतिया की राह कुछ परेशानी भरी है लेकिन मंत्री बनने के बाद उन्हें फायदा होता दिख रहा है। इस क्षेत्र में तोमर ठाकुर मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है और इनका झुकाव भाजपा की तरफ रहा है। इसे देखते हुए ही कांग्रेस ने तोमर को टिकट दी है लेकिन क्या इतने मात्र से तोमर मतदाता थोकबंद होकर कांग्रेस को मिल जाएंगे इसकी अधिक संभावना नहीं है। इसका कारण यह है कि नरेंद्र सिंह तोमर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं और उन्हें मोदी के साथ ही अमित शाह का विश्‍वासपात्र माना जाता है। दिमनी विधानसभा क्षेत्र उनके ही संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है इस कारण इस जाति के मतदाताओं का कितना समर्थन कांग्रेस के तोमर उम्मीदवार जुटा पाते हैं यह देखने वाली बात होगी। कांग्रेस प्रत्याशी तोमर बसपा, भाजपा और कांग्रेस सहित तीनों दलों में रह चुके हैं। 2008 के विधानसभा चुनाव में तोमर बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और 500 से भी काफी कम कम मतों के अंतर से ही भाजपा के उम्मीदवार शिवमंगल सिंह से चुनाव हार गए थे। उसके बाद भाजपा में चले गए थे और यदि वही रहते तो शायद विधायक बन गए होते लेकिन कांग्रेस में वापस लौट आए और कांग्रेस टिकट पर बसपा उम्मीदवार बलबीर सिंह दंडोतिया से चुनाव हार गए थे?

और अंत में….

2018 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बाकी चार चुनावों में चुनावी मुकाबला काफी नजदीकी और कांटे पूर्ण रहा है तथा जीत हार का फैसला 3000 से कम मतों के अंतर से होता रहा है इसलिए 2020 के विधानसभा उपचुनाव में दिलचस्पी का विषय यही रहेगा कि दिमनी में किसके आंगन में जीत का दिया जलेगा। यह क्षेत्र 2008 से सामान्य निर्वाचन क्षेत्र हो गया है इसके पहले यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। 1998 के चुनाव में भाजपा के मुंशीलाल ने कांग्रेस के मास्टर हरि सिंह सखवार को मात्र 997 मतों से पराजित किया था। 2003 की कांग्रेस विरोधी लहर में भी भाजपा की संध्या राय कांग्रेस के हरि सिंह को 2564 मतों के अंतर से ही हरा पाई थीं। 2008 में यह क्षेत्र सामान्य वर्ग के लिए हो गया और भाजपा के शिवमंगल सिंह तोमर ने बसपा के रवींद्र सिंह तोमर को मात्र 256 मतों के अंतर से पराजित किया। 2013 विधानसभा चुनाव में बसपा के बलबीर सिंह दंडोतिया ने कांग्रेस के रविंद्र सिंह तोमर को 2106 मतों से पराजित किया। 2018 के चुनाव में कांग्रेसी गिर्राज सिंह दंडोतिया ने भाजपा के शिवमंगल सिंह तोमर को 18477 मतों से पराजित किया। अब यह तो चुनाव नतीजों से ही पता चल सकेगा कि विधानसभा में कौन पहुंचेगा और जो भी पहुंचेगा वह पसीने से लथपथ पहुंचेगा या आसानी से टहलते हुए पहुंच जाएगा।

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