लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संबंधी 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 गिरा

नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद इस महत्वपूर्ण बिल पर शुक्रवार शाम को वोटिंग हुई। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें 298 सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। जिससे लोकसभा में यह प्रस्ताव गिर गया। जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को कल (शनिवार) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह विधेयक दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं हो सका। अब इस संविधान संशोधन विधेयक पर आगे की कार्यवाही करना संभव नहीं है। दो अन्य विधेयकों के संबंध में आगे की कार्यवाही पर सत्ता पक्ष द्वारा निर्णय लिया जाना है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे। इससे पहले लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण पर शुक्रवार को जारी बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान अमित शाह ने कहा कि, इस संशोधन विधेयक का विपक्ष विरोध कर रहा है। वहीं, लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए कहा था कि पार्टी महिलाओं के मुद्दे के पीछे छिपकर देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है। महिलाओं को आरक्षण देने की बजाय असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहा विपक्ष
बिल पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, बोलने के समय सबने कहा कि हम पक्ष में हैं। इंडी अलायंस के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु करके महिला आरक्षण का विरोध किया है। मुझे लगा कि इम्प्लीमेंटेशन के तरीके का विरोध हो है, लेकिन नहीं। केवल और केवल महिला आरक्षण का विरोध है। ये तरीकों का नहीं, बिल का विरोध है। बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है। किसी किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं। संविधान में इसका अधिकार सरकार के पास है। जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं। संविधान में परिसीमन का प्रावधान है।
अमित शाह ने कहा, देश की जनता निर्णय करती है। जनता चुनकर सदन में भेजती है। परिसीमन के दौरान रोड, रेलवे आदि की स्थिति को भी सदन में बताया जाएगा। मोदी जी के नेतृत्व में सरकार यह संविधानिक सुधार लेकर आई है। साल 1971 में कांग्रेस सरकार थी। उस वक्त सीटों को फ्रीज कर दी गई थी। 71 से अबतक सीटों की संख्या अब तक फ्रीज रही। 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। कोई मुझे बताए कि कोई भी सांसद इतने मतदाताओं वाले लोकसभा सीट को कैसे ठीक से देख सकता है।

परिसीमन को लेकर भ्रम फैला रहा है- शाह
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा, परिसीमन आयोग और संवैधानिक सुधारों को लेकर यह भ्रामक नैरेटिव (फैलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि इससे किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा। वर्तमान में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों की सदन में कुल 129 सीटें हैं, जो परिसीमन और सुधारों के बाद बढक़र 195 हो जाएंगी। प्रतिशत की दृष्टि से देखें तो यह हिस्सेदारी 23.76′ से बढक़र 23.87′ हो जाएगी। इसमें किसी के अहित की कोई गुंजाइश नहीं है। यदि विपक्ष को 50 फीसदी का प्रावधान लिखित में चाहिए, तो मैं प्रस्ताव देता हूँ कि सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित की जाए। मैं इस विधेयक को आवश्यक सुधारों के साथ पुन: प्रस्तुत करने के लिए तैयार हूं। शाह ने कहा, केसी वेणुगोपाल ने 50 प्रतिशत आरक्षण और 50 प्रतिशत सीटों की बात कही है। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं; सदन की कार्यवाही को एक घंटे के लिए स्थगित किया जाए, मैं अभी इसमें सुधार कर सकता हूँ। हमें न तो कोई चोरी करनी है और न ही कुछ लूटना है, इसलिए हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा: अब तक का हमारा अनुभव यह रहा है कि यदि भाजपा लिखित में यह भी दे दे कि वे किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाएंगे, तब भी हमें उन पर भरोसा नहीं होगा।

अमित शाह ने उत्तर दिया- राहुल गांधी ने जो प्रस्ताव रखा है, उस पर मैं कहना चाहता हूँ कि महिला आरक्षण 2029 से पहले ही लागू होना चाहिए। इस देश की महिलाएं भली-भाँति देख रही हैं कि उनके अधिकार के रास्ते में रोड़ा कौन अटका रहा है। आप शोर मचाकर आज तो बच सकते हैं, लेकिन चुनाव में माताएं और बहनें आपका हिसाब करेंगी।
धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देंगे- अमित शाह

अमित शाह ने कहा- मैं सरकार की, संविधान की और भाजपा की नीति साफ करना चाहता हूं। संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण स्वीकार नहीं करता। संविधान में कहीं पर भी धर्म के आधार पर आरक्षण की मान्यता नहीं है। इंडी अलायंस ने तुष्टीकरण के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं। हमारी सरकार की नीति साफ है कि धर्म के आधार पर आरक्षण न आज देंगे न किसी को देने देंगे। ओबीसी आरक्षण पर- देश में ओबीसी का सबसे बड़ा कोई विरोध पार्टी है तो कांग्रेस है। इन्होंने चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी, दोनों को कार्यकाल पूरा करने नहीं दिया। 1957 में काकासाहेब समिति के सुझाव आए, कांग्रेस ने सुझाव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इंदिरा सरकार में मंडल आयोग के सुझान को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश: राहुल

लोकसभा में कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि, हम सभी ने महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है। राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल 2023 में पास हो चुका है, पहला सच ये है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता है। राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि पुराना बिल लाइए, हम उसे पास कराएंगे। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार देश के ओबीसी भाई-बहनों को ताकत नहीं देना चाहती है, ये एससी-एसटी के अधिकार छीनने की कोशिश है। राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का एक प्रयास है; इसके लिए भारत की महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनकी आड़ ली जा रही है।

भाजपा को अपनी शक्ति में गिरावट का डर
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न रहे। विपक्ष के नेता ने आगे कहा कि भाजपा को अपनी शक्ति में गिरावट का डर सता रहा है, सरकार भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, कल मैं अपनी बहन को कुछ ऐसा करते हुए देख रहा था जो उसने पांच मिनट में हासिल कर लिया, जो मैं शायद अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाया – अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना।

दक्षिण के राज्यों को घबराने की जरूरत नहीं
राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि दक्षिण के राज्यों को घबराने की जरूरत नहीं है, हम दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम नहीं होने देंगे। राहुल गांधी ने कहा- मैं दक्षिणी, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम सरकार को भारत संघ में आपके प्रतिनिधित्व को छूने नहीं देंगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि सरकार जो कर रही है वह राष्ट्रविरोधी कृत्य से कम नहीं है; हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे, पूरा विपक्ष इसे हराएगा।

संसद में ठहाके: प्रधानमंत्री और मेरे साथ वाइफ इशू नहीं

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री और मुझे ‘पत्नी वाला मुद्दा’ नहीं है, जिससे सदन में हंसी का माहौल बन गया। इसके बाद राहुल गांधी ने गंभीर स्वर अपनाते हुए महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं देश की सामूहिक सोच और कल्पना की महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है चाहे वह परिवार हो, समाज हो या सार्वजनिक जीवन।

जाति जनगणना को लेकर भी उठाए सवाल
सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केवल जाति जनगणना शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसका उपयोग संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए किया जाएगा या नहीं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना को अगले कई वर्षों तक प्रतिनिधित्व से अलग रखने की योजना बना रही है, जो सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।