रायपुर/ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सक्ती जिले में डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 9 मजदूरों की मौत एवं 50 से अधिक मजदूरों के घायल होने का समाचार अत्यंत हृदय विदारक और पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को संबल प्रदान करे।
इस दुर्घटना के लिए प्रबंधन और प्रशासन जिम्मेदार। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह हादसा नहीं हत्या, भाजपा के कुशासन में औद्योगिक हादसों में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस मामले में 50 से अधिक लोगों के झुलसकर घायल होने की सूचना है, घायलों के बेहतर इलाज की समुचित व्यवस्था कर न्यायिक जांच कराई जाए और मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ और घायलों को 50-50 लाख मुआवजा दे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है, कुछ महीना पहले गोदावरी प्लांट (रायपुर) में भट्टी विस्फोट और स्वदेश मेटालिक प्लांट (बलौदाबाजार) में 30 फीट की ऊँचाई से गिरकर श्रमिक की मौत सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाते हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि भट्टी बंद किए बिना ही जोखिम भरे काम करवाना, सुरक्षा उपकरणों का न होना और बिना उचित परमिट के काम करना सामान्य बात हो गई है जो सुरक्षा तंत्र की विफलता का स्पष्ट संकेत है। औद्योगिक क्षेत्रों में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस का लगातार विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, लेकिन इस सरकार का चरित्र शुतुरमुर्ग की तरह है। पूरे प्रदेश में संचालित उद्योगों में सुरक्षा ऑडिट कर तय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें सरकार।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के उद्योगों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लगातार गंभीर हादसे हो रहे हैं, जिससे अनेकों श्रमिकों की मौत हुई है, कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। रायगढ़, सिलतरा और बलौदाबाजार जैसे क्षेत्रों में विस्फोट और ऊँचाई से गिरने जैसी घटनाओं के चलते प्रबंधन, सुरक्षा विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में हुए हादसों में (एसओपी) का पालन न करना मुख्य कारण पाया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के चलते कारखाना अधिनियम, 1948 और छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 का कड़ाई से पालन न करने की वजह से स्थिति दिनोदिन बदतर हो रही है। कई इकाइयों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जाती हैं, लेकिन सख्ती की कमी के चलते हादसों का सिलसिला लगातार जारी है। प्रशासन और श्रम विभाग अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है।
