नशा समाज को विकलांग बना रहा है: दीदी मां मंदाकिनी

00 सरकार केवल अर्थ लाभ ही न देखे, अपनी प्रजा की भी सोंचे

00 यौन शिक्षा की भांति इसे भी शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए

रायपुर। मानस मर्मज्ञ दीदी मां मंदाकिनी ने आज की बढ़ती नशावृत्ति पर गहरी चिंता जताई है। नशे में लिप्त यह पीढ़ी आखिर जा कहां रही हैं ? तब जरा सोचिए कहां रह जायेगा हमारा परिवार व समाज, नशा समाज को धीरे-धीरे विकलांग कर रहा है। तब भारत विश्वगुरु नहीं बल्कि विकलांग गुरु जरूर हो जायेगा। सत्संग, कथा के माध्यम से उन्हें नशाखोरी से दूर रहने के लिए हम हमेशा कहते है। लेकिन जब तक सरकार की ठोस नीतियां नहीं बनेगी,रोक पाना संभव नहीं। घर में माता-पिता को भी हमेशा सजग रहना होगा कि उनके बच्चे कहीं नशा तो नहीं कर रहे हैं। मदिरापान से शरीर को केवल नुकसान ही होगा इसलिए कथा सत्संग या मंदिरों में जाएं,भले ही दिखावे के लिए सहीं पर वहां जाने से आध्यात्म व परमात्मा के साथ जुडऩे से आत्मबल बढ़ेगा।
दीदी मां मंदाकिनी ने कहा कि हर साल वे कथा सत्संग के लिए छत्तीसगढ़ आती हैं और यहां के लोग भी इस विषय को प्रमुखता से उनके पास रखते हैं। शराब ही नहीं बल्कि नशे की और भी वृत्तियों की बढ़ती प्रवृति चिंतनीय है। मदिरा बिक्री से निश्चित रुप से सरकार को अर्थ लाभ हो रहा है इसका उदाहरण मैंने कोविड के समय देखा जब सभी जगह के दरवाजे बंद थे लेकिन मदिरापान का दरवाजा हमेशा खुला था। जब सारी प्रजा ही नशे का आदी हो जायेगा तो कहां रह जायेगा हमारा समाज। नशा करने वालों के शरीर में कुछ रह गया है तो वह है केवल बीमारी, स्वस्थता तो कहां चली गई है पता ही नहीं है। शरीर अस्वस्थ और मन घोर दरिद्रता से लिप्त है तो ऐसी स्थिति में कैसे होगा व्यक्ति व समाज का विकास। एक ओर यौन शिक्षा देकर यह बताया जा रहा है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा,तब नशे को लेकर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में यह क्यों नहीं जोड़ा जा सकता। बच्चों को छोटेपन से ही बताया जाना जरूरी है कि नशा किस प्रकार शरीर के लिए घातक है। ये विचार व जागृति शिक्षानीति में शामिल किया जाना चाहिए। नीति निर्धारकों को एक चुनौती मानकर इसे कड़ाई से और ठोस फार्मूले के साथ अपनाना होगा ताकि ऐसा न हो कि जैसे सिगरेट के पैकेट पर लिखा रहता है इसे पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है फिर भी लोग पीये जा रहे हैं और जब तक सचेत होते हैं जान चली जाती है।
दीदी मां मंदाकिनी ने कहा कि सरकार अपनी योजनाओं को प्रचारित करने के लिए जिस प्रकार के संसाधनों का उपयोग करती है नशे को रोकने के लिए भी वैसा किया जाना चाहिए। टीवी-मोबाइल व अन्य माध्यमों से बार-बार प्रचारित किया जाना चाहिए कि यह किस प्रकार शरीर के लिए नुकसानदायक है। आजकल तो छोटे बच्चे तक दिन भर टचस्क्रीन मोबाइल से चिपके रहते हैं। यदि आज नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।
कुछ धर्माचारियों के बीच चल रहे विवाद पर दीदी माँ ने कहा कि इस पर वे टीका टिप्पणी नहीं करना चाहती। विवाद किस विषय को लेकर है ये भी देखें। सनातन धर्म में बहुत ही व्यापक दृष्टि है उनके यहां एक ही देवता है लेकिन हमारे यहां तैतीसकोटी। अब आप देखिए यहां देवताओं में भी आपस में लड़ाई होती है कि भक्त हमें पूजे। हमारे यहां हर चिंतन को महत्व दिया जाता है और किसी को काट करके अपने को बड़ा करने की जो प्रवृत्ति है एक स्वस्थ व्यक्ति की नहीं है। हमारे गुरुदेव ने कभी भी किसी का अपमान व निंदा नहीं किया, तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में किसी का खंडन नहीं किया और सबको प्रणाम किया। किस धर्म के धर्मगुरुओं के बीच में भी लड़ाई नहीं होती है लेकिन सही पक्ष को ही जनमानस के बीच रखा जाना चाहिए।