गंगटोक। छत्तीसगढ़ के 12 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने अपने सात दिवसीय सिक्किम अध्ययन प्रवास के दौरान भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, सिक्किम हिमालयी क्षेत्रीय केंद्र का विस्तृत दौरा किया। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के नेतृत्व में इस दल ने हिमालयी क्षेत्र की लुप्तप्राय वनस्पतियों के संरक्षण और केंद्र सरकार द्वारा संचालित आधुनिक वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण प्रणालियों का अवलोकन किया।
मीडिया टीम ने केंद्र के ‘हर्बेरियम’ विभाग का भ्रमण किया, जहाँ भविष्य के शोध के लिए पौधों के नमूनों को संरक्षित किया जाता है। वैज्ञानिकों ने प्रतिनिधिमंडल को प्रदर्शित किया कि किस प्रकार नमूनों को सुखाकर, रसायनों द्वारा उपचारित कर और डेटा शीट पर सुरक्षित कर सदियों तक संरक्षित रखा जाता है। यह डेटाबेस न केवल शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित हुआ है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के विश्लेषण में भी इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत के कुल भू-भाग का मात्र 0.2% होने के बावजूद, सिक्किम देश की लगभग 26% फूल वाले पौधों की प्रजातियों का घर है। वर्तमान में इस बी एस आई क्षेत्रीय केंद्र में 55,000 से अधिक पादप नमूने वैज्ञानिक रूप से संरक्षित हैं। ‘विकसित भारत’ डिजिटल मिशन के अनुरूप, हजारों नमूनों को सफलतापूर्वक डिजिटल डेटाबेस में परिवर्तित किया जा चुका है, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान और अधिक सुलभ हो गया है। केंद्र 500 से अधिक स्थानिक और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष परियोजनाएं संचालित कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने निष्कर्ष निकाला कि सिक्किम का यह संरक्षण मॉडल छत्तीसगढ़ जैसे वन-समृद्ध राज्यों के लिए, विशेष रूप से अनुसंधान और डेटा प्रबंधन के मामले में, अत्यंत अनुकरणीय है।
