किसानों के हित में राज्य सरकार का अहम निर्णय; मुख्यमंत्री साय ने धान खरीदी में दो दिवस की वृद्धि की घोषणा की

*अब 5 और 6 फरवरी को खरीदा जाएगा किसानों का धान*

*प्रदेश में अब तक 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी*

*25.11 लाख से अधिक किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रूपए का भुगतान*

रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धान खरीदी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियों के किसानों को धान विक्रय हेतु अतिरिक्त दो दिवस – 05 एवं 06 फरवरी 2026 तक खरीदी की अनुमति प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार तीन प्रकार के किसान इस अतिरिक्त अवधि में धान विक्रय कर सकेंगे— ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात टोकन हेतु आवेदन किया गया, किंतु सत्यापन नहीं हो पाया है। ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात आवेदन किया गया तथा सत्यापन उपरांत उनके पास धान पाया गया है। ऐसे किसान, जिन्हें दिनांक 28 जनवरी 2026, 29 जनवरी 2026 एवं 30 जनवरी 2026 को टोकन प्राप्त हुआ था, परंतु किसी कारणवश वे निर्धारित तिथि पर धान विक्रय नहीं कर पाए थे।

किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए बारदाना एवं हमालों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी उपज के सुरक्षित एवं सुचारु विक्रय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि 15 नवम्बर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रूपए का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। सरकार द्वारा धान खरीदी की तिथि बढ़ाये जाने से अब उन छूटे हुए किसान भी सुगमतापूर्वक अपना धान बेच सकेंगे।

इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था और किसान-हितैषी व्यवस्था से किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही वास्तविक किसानों को लाभान्वित करने का संकल्प सार्थक हो रहा है। राज्य में इस खरीफ सीजन के लिए 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है।

प्रदेशभर में संचालित सभी 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, डिजिटल निगरानीयुक्त और पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे।