नव-संकल्प का क्षण

साल 2025 बुधवार की रात्रि घड़ियों की सुई के 12 पार होते ही इतिहास का हिस्सा बन गया और नया वर्ष 2026 प्रारंभ हो गया। बीते साल हमने क्या खोया-क्या पाया, यह बहस का हिस्सा हो सकता है। इस पर चिंतन जरूर होना चाहिए। वैसे नव वर्ष जहां एक ओर उत्साह-उल्लास का मौका प्रदान करता है। वहीं, एक सुनहरे सपने को साकार करने का संकल्प लेने का भी अवसर होता है। इसलिए नए साल में पुरानी विफलताओं को भूलकर नई सफलताओं के लिए गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ें। वैसे बीते साल देश ने तकनीक, डिजिटल, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में विकास को नई गति दी, तो लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और रोजगार जैसी चुनौतियां भी सामने रहीं। साथ ही उन घटनाओं की भी याद आती है जहां अमानवीय हाथों ने मानवता को कलंकित किया। कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला और दिल्ली में कार बम विस्फोट में कितने लोग असमय मौत के मुंह में समा गए। कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई। कितनी महिलाओं का सुहाग छिन गया। वहीं, महाकुंभ में हादसा, दिल्ली स्टेशन में भगदड़ और अहमदाबाद में हवाई दुर्घटना भी लोगों को रुला गई। इन सब घटनाओं के बीच देश में एआई, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप संस्कृति ने भविष्य की संभावनाएं मजबूत कीं, लेकिन असमानता, जलवायु संकट और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे सवालों ने नीति-निर्माताओं की परीक्षा भी ली। ऐसे समय में नए साल का संदेश स्पष्ट होना चाहिए विकास समावेशी हो, संवाद सशक्त हो और निर्णय दूरदर्शी हों। सत्ता और विपक्ष के बीच स्वस्थ बहस लोकतंत्र की मजबूती है। असहमति को बाधा नहीं, दिशा मानना होगा। जहां तक छत्तीसगढ़ की बात है तो बीते साल राज्य में नक्सलवाद पर अंकुश सबसे बड़ी उपलब्धि रही। सालों से लाल आतंक की समस्या से जूझ रहे प्रदेश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। मुठभेड़ में बसवराजू, चलपति, हिड़मा जैसे कई बड़े नक्सली नेता मारे गए। जबकि रुपेश सहित कई बड़े नक्सली सरकार के सामने हथियार डालने को मजबूर हो गए। देश का सबसे बड़ा नक्सल आत्मसमर्पण भी इसी साल हुआ। बीता साल छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती का साल रहा। इस अवसर पर राज्यभर में विविध सांस्कृतिक, सामाजिक और विकासात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य को स्वच्छता, जल संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, हस्तशिल्प और नगरीय निकाय जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगभग 19 राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। प्रदेश में पहली बार 60वां अखिल भारतीय डीजी-आईजीपी सम्मेलन नवा रायपुर में आयोजित हुआ। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी पहुंचे। इसमें देश के सभी राज्यों के लगभग 300 से अधिक अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में आतंरिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ। छत्तीसगढ़ के लिए यह सम्मेलन ऐतिहासिक रहा। उपलब्धियों के साथ ही छत्तीसगढ़ में दुखद घटनाएं भी हुईं। बिलासपुर में एक बड़ा रेल हादसा हुआ, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसके साथ ही राज्य ने साल के अंत में ज्ञानपीठ से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को खो दिया।बहरहाल, आने वाला साल कैसा हो? यह सवाल लोगों के दिमाग में उमड़-घुमड़ रहा है। सभी चाहते हैं कि भय और भ्रष्टाचार मुक्त साल बीते। परिवर्तन से भय नहीं है। अक्सर बदलाव तरक्की को हवा देता है। नया साल केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं है, बल्कि आत्म मंथन और नव-संकल्प का क्षण है। बीते वर्ष की उपलब्धियां हमें आत्मविश्वास देती हैं, तो कमियां सुधार का रास्ता दिखाती हैं। यही संतुलन समाज, राजनीति और शासन तीनों के लिए जरूरी है। नया साल उम्मीद का नाम है। यह उम्मीद तभी सार्थक होगी जब हम व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक संकल्प को साथ लेकर चलें।

नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं…!