0 कर्मचारी – अधिकारी फेडरेशन का तीन दिवसीय प्रदर्शन जारी, प्रदेशभर में चार लाख से अधिक लोग हुए शामिल
रायपुर । छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और अधिकारियों ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश के लगभग 4 लाख से अधिक कर्मचारी-अधिकारी सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं। इस आंदोलन के कारण राज्य के लगभग सभी विभागों का कामकाज प्रभावित होने लगी हैं। कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में भी सरकार ने लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया। तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। फेडरेशन पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कई बार ज्ञापन सौंपे गए, बैठकें और संवाद भी हुए।लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी अनदेखी के विरोध में कर्मचारियों ने निर्णायक आंदोलन का रास्ता चुना है। 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) देने की मांग शामिल है। इसके अलावा 2019 से लंबित डीए एरियर्स को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग भी प्रमुख है। पदोन्नति और नियमितीकरण पर जोर
फेडरेशन ने चार स्तरीय समयमान वेतनमान, सहायक शिक्षकों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय वेतनमान, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन और पदोन्नति देने की मांग उठाई है। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति को निःशर्त लागू करने और 10 प्रतिशत सीलिंग समाप्त करने की भी मांग की गई है।
*प्रदर्शन: कई विभागों में कामकाज प्रभावित*
जानकारी के अनुसार तीन दिवसीय हड़ताल में प्रदेश के लिपिक, शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग, महिला शिक्षकों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों, बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संवर्गो के अधिकारी और कर्मचारी शामिल है। इस वजह से सरकारी कामकाज ठप रहा । हड़तालियों में सर्वाधिक संख्या शिक्षकों की होने के कारण अध्यापन का कार्य प्रभावित हुआ।
कर्मचारियों ने अन्य भाजपा शासित राज्यों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने और सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग रखी है। इसके अलावा पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और संविदा, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की भी मांग आंदोलन में शामिल है।
*मांगे नहीं मानने पर उग्र आंदोलन की तैयारी*
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि हम अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 29 से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहे है। कई बार सरकार से बातचीत की कोशिश की गई , लेकिन हमारी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।
