छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र नए विधानसभा भवन में रविवार से शुरू हो गया है। सत्र के पहले दिन छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस महत्वपूर्ण विजन डॉक्यूमेंट की रूपरेखा को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने इसके उद्देश्य, आवश्यकता और क्रियान्वयन की रूपरेखा को विस्तार से बताया। श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर- 2047 केवल एक नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों में राज्य को समृद्ध, आत्मनिर्भर और समावेशी विकास की दिशा में ले जाने का संकल्प है। वित्त मंत्री ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी विकास और युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं को देखते हुए योजनाबद्ध और दूरदर्शी नीति अनिवार्य है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि युवा, महिला, किसान, व्यापारी सभी वर्गों से अलग-अलग मुलाकात कर उनसे सलाह-मशविरा करके विजन डाक्यूमेंट तैयार किया गया है। मैं अनेक अवसरों पर उनके साथ रहा हूं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अधोसंरचना जैसे 13 क्षेत्रों को विशेष फोकस कर इनके विकास के लिए 10 मिशन गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह विजन प्रदेश को वर्ष-2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का स्पष्ट रोडमैप है। यह दस्तावेज आने वाले वर्षों में राज्य के विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी सदस्यों से सहभागी बनने का आह्वान किया। लेकिन इस चर्चा में विपक्ष की गैर मौजूदगी कई सवाल खड़े कर रहा है। खासकर ऐसे समय में जब सत्ता पक्ष यह कहते नहीं अघा रहा है कि वह विजन-2047 को लेकर गंभीर है। यदि सचमुच वह गंभीर होता तो विपक्ष से बातचीत कर उसकी सहमति से समय तय कर चर्चा के लिए उसे तैयार करता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और विपक्ष की अनुपस्थिति में विधानसभा में चर्चा की गई। दरअसल, देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के लक्ष्य के मद्देनजर केंद्र और राज्यों ने विजन -2047 की परिकल्पना की है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में इस पर चर्चा कराई। छत्तीसगढ़ विजन का उद्देश्य राज्य को सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाना है, ताकि 2047 तक छत्तीसगढ़ एक सक्षम और मजबूत राज्य के रूप में देश में अपनी अलग पहचान बना सके। यह कोई सरकारी योजना नहीं है बल्कि दीर्घकालिक रोडमैप है। इसके कई मायने हैं। इस विजन के तहत विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, युवाओं के लिए उनका रोजगार और कौशल विकास, आदिवासी ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों का समान विकास करना है। साथ ही कृषि, खनिज, उद्योग और एमएसएमई को मजबूती देना है। आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों की आय में वृद्धि और वनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा देना है। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा, तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्कील डेवलपमेंट तथा अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देना है। स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना भी इसमें शामिल है। हमारा मानना है कि यह विजन डॉक्यूमेंट महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस पर विपक्ष की भागीदारी भी जरूर होनी चाहिए। यह दस्तावेज केवल आज की जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक समग्र दृष्टिकोण है। ऐसे में विपक्ष का चर्चा से दूर रहना यह बताता है कि विकास जैसे दीर्घकालिक विषय में भी वह दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि विजन दस्तावेज पहले से तय था। चर्चा केवल औपचारिक थी। उसके सुझावों को सरकार गंभीरता से नहीं लेती। यह स्थिति सरकार और विपक्ष के बीच विश्वास के संकट को बताता है। वैसे लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल विरोध की नहीं बल्कि नीतियों को बेहतर बनाने में सहयोग देने की भी होती है। ऐसे में विपक्ष को राजनीतिक रचनात्मक भागीदारी दिखानी होगी। वहीं, सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि यदि वह विजन डॉक्यूमेंट को प्रभावी बनाना चाहती है तो उसे विपक्ष के साथ समावेशी संवाद करना होगा। बहरहाल, छत्तीसगढ़ किसी एक दल की स्थाई संस्था नहीं है। पक्ष-विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वह छत्तीसगढ़ को एक आत्मनिर्भर, विकसित और समावेशी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 पर चर्चा कितनी सार्थक?
