रिजर्व बैंक के निर्णय से जनता को मिले लाभ

महंगाई के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने और आर्थिक विकास की तेज होती रफ्तार के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर में 0.25% की कटौती कर दी है। साथ ही ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) से एक लाख करोड रुपए के सरकारी बॉन्ड खरीदने का ऐलान कर बाजार को बड़ी राहत दी है। इस दोहरे कदम से बाजार में नगदी की मात्रा बढ़ेगी और कर्ज की लागत कुछ कम होगी यानी घर, कार और खुदरा सहित अन्य सभी तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे। कर्ज की किस्तें कम होने से उपभोक्ताओं की जेब में ज्यादा पैसा बचेगा। इससे बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था की गति को और रफ्तार दे सकती है। निश्चित रूप से रिजर्व बैंक का यह निर्णय आम जनता को राहत देने वाला है। रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में कुल 1.25% की कटौती की है, लेकिन कर्ज में आधा ही फायदा मिल पाया। मौजूदा कटौती से पहले यानी फरवरी से अप्रैल तक रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में एक प्रतिशत की कटौती की थी। इसकी तुलना में बैंकों ने अपने लोन की दरों में केवल 0.58% की कटौती ही की है। बैंकों का तर्क है कि कर्ज देने के लिए जुटाए गए फंड यानी जमा पर उन्हें ज्यादा ब्याज दर चुकानी पड़ रही है। इसलिए वे रिजर्व बैंक की कटौती के बाद भी ग्राहकों को पूरा फायदा नहीं दे पा रहे हैं। रिजर्व बैंक के इस निर्णय का असली फायदा आम जनता को मिलना चाहिए और उसकी जेब में पैसा जाना चाहिए। दरअसल, रिजर्व बैंक जिस दर पर बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो दर कहते हैं। जब यह दर घटती है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वह इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। इसी तरह ओपन मार्केट ऑपरेशन ऐसा तरीका है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक बाजार में पैसों की सप्लाई यानी लिक्विडिटी को कंट्रोल करता है। आसान भाषा में कहे तो यह सरकारी सिक्योरिटीज (बॉन्ड)की खरीदी-बिक्री है। जब रिजर्व बैंक इन बॉन्ड्स को खरीदता है, तो वह बैंकों को नगदी देता है। इससे बाजार में पैसा बढ़ता है और रिजर्व बैंक इन बॉन्ड्स को बेचता है, तो वह बैंकों से नगदी लेता है। इससे बाजार में पैसा कम हो जाता है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अक्टूबर के बाद से अर्थव्यवस्था में तेजी आने से महंगाई में कमी देखी गई है। जिसके कारण रिजर्व बैंक का महंगाई दर अनुमान का दो प्रतिशत का निचला स्तर भी टूट गया है। रिजर्व बैंक दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 4% महंगाई का लक्ष्य लेकर चलता है। दरअसल 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में महंगाई 2.2% की दर और अर्थव्यवस्था में 8.0% की वृद्धि दर को दुर्लभ स्वर्णिम काल कह सकते हैं। रिजर्व बैंक ने मार्च तक के वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2% कर दिया है। अब रेपो रेट में कटौती के बाद अगर बैंक ब्याज दरों में 0.25% की कटौती करते हैं तो इसे 20 लाख के 20 साल के कर्ज पर प्रति माह 310 रुपए की बचत होगी। हालांकि रेपो रेट की दर में कटौती का अर्थव्यवस्था में असर दिखने में समय लगता है। ब्याज देने धीरे-धीरे नीचे आएंगी। होम और ऑटो लोन जैसे कर्ज सस्ते होने से बाजार में मांग बढ़ेगी। टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्र में जिनका निर्यात अमेरिका को होता था, टैरिफ बढ़ने से उनकी चुनौतियां बढ़ी है। बाकी अर्थव्यवस्था ठीक-ठाक है। यदि आगे अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर कोई खतरा नजर आता है तो रिजर्व बैंक रेट कट कर सकता है। चूंकि महंगाई कम है। ऐसे में रिजर्व बैंक रेट कट करने में हिचकेगा नहीं। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपए का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना चिंता का विषय है। लेकिन यह भी सच है कि रिजर्व बैंक घरेलू मुद्रा का कोई भी स्तर तय नहीं करता। बाजार इसकी कीमतें करता है। बहरहाल, रेपो रेट में 0.25% की कटौती का निर्णय अर्थव्यवस्था की गति के लिए स्वागत योग्य कदम है। लेकिन रिजर्व बैंक को यह देखना होगा कि इसका लाभ आम जनता को मिले और यह तभी संभव है जब बैंक ब्याज दरों में कटौती करेंगे। रिजर्व बैंक का यह निर्णय आंकड़ों में उलझकर ना रह जाए इसके लिए सतत मॉनिटरिंग की जरूरत है। उम्मीद है कि रिजर्व बैंक की इस पर नजर रहेगी।