सुरक्षा तंत्र के सामने उभरती चुनौतियों को हल करने के लिए नए तरीके खोजने पर जोर

0 डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन: दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई बैठक
रायपुर। रायपुर में आयोजित 60वें अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन का दूसरा दिन शनिवार की सुबह शुरू हुआ। पूरे देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बैठक हुई। बैठक के बाद पीएम मोदी ने डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस की तारीफ की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया है। जिसमें पीएम मोदी ने कहा कि ‘रायपुर में डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस के पहले दिन भारत के सिक्योरिटी सिस्टम के अलग-अलग पहलुओं पर गहरी चर्चा हुई। यह इस फील्ड में बेस्ट प्रैक्टिस और इनोवेशन शेयर करने के लिए एक शानदार फोरम है।’ उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस में सुरक्षा व्यवस्था के तमाम पहलुओं पर गहरी और सार्थक चर्चा हुई। पीएम मोदी के मुताबिक, यह कॉन्फ्रेंस इस फील्ड में बेस्ट प्रैक्टिस और इनोवेशन शेयर करने के लिए एक शानदार फोरम है- जहाँ पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी अपने अनुभव और सुझाओं को एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं। विशेष रूप से, इस मंच पर उन चुनौतियों पर बात हुई जो आज सुरक्षा तंत्र के सामने हैं, और उन्हें हल करने के लिए नए तरीके खोजने पर जोर रहा। मोदी ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे हमारी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनेगी।
बैठक में पैरामिलिट्री फोर्सेस के अधिकारियों के साथ चर्चा हुई। इसके अलावा पीएम मोदी और मंत्री शाह ने एंटी नक्सल ऑपरेशन, पाकिस्तान, बांग्लादेश सीमा राज्यों पर फोर्स के काम पर भी चर्चा की। साथ ही आधिकारियों ने हाल ही में हुए ऑपरेशंस की जानकारी दी। इसके अलावा बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएफएफ जैसी फोर्सेस के अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।
साथ ही चर्चाओं में पुलिस प्रशासन के सामने मौजूद नई चुनौतियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। जन-आंदोलनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के बेहतर तरीकों पर चर्चा होने के साथ ही विदेशी भगोड़ों को वापस लाने की रणनीति पर भी विचार किया हुआ। फॉरेंसिक तकनीक को और अधिक उपयोगी बनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर अपराधों की जांच को मजबूत करने तथा आधुनिक सुरक्षा ढांचे के निर्माण को लेकर अधिकारियों से सुझाव लिए गए।
सम्मेलन में कई राज्यों के डीजीपी अपने प्रस्तुतीकरण दिए. जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा पर उभरते खतरे, पहले दिए गए सुझावों की समीक्षा और महिला सुरक्षा में तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल जैसे विषय प्रमुख थे।