– अरुण पटेल
किसी भी पार्टी में नाराज चल रहे नेताओं को असंतुष्ट कहा जाता है लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने एक नया शब्द प्रयुक्त करते हुए कहा है कि हम असंतुष्ट नहीं पार्टी के ’शुभचिंतक’ हैं। पार्टी की चिंता करने वाले शुभचिंतकों की संख्या कम होने की जगह बढ़ती जा रही है इसलिए अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि भाजपा नेतृत्व इन शुभचिंतकों की चिंता कब तक दूर कर पाएगा।
27 विधानसभा उपचुनावों को लगभग डेढ़ माह का समय शेष है क्योंकि निर्वाचन आयोग ने जो संकेत दिए हैं उसके अनुसार अक्टूबर माह में यह हो सकते हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में होने वाले 16 उपचुनाव में बड़े नेताओं के प्रचार को लेकर सीमा निर्धारित करने से उनमें भी कुछ नाराजगी पैदा होने की खबरें निकल कर सामने आ रही हैं। यह नेता असंतुष्ट की श्रेणी में नहीं आते हैं फिर भी चुनावी तैयारियों से उन्होंने दूरी बना ली है। भाजपा के भीतर घमासान के संकेत मिलने लगे हैं। असंतुष्ट भी लामबंद होने लगे यह बात अलग है कि वह फिलहाल दायरे में रहकर अपनी भावनाओं से पार्टी नेताओं को अवगत करा रहे हैं और स्वयं को शुभचिंतक कह रहे हैं। शुभचिंतकों की चिंता उपचुनावों की दृष्टि से पार्टी पर कहीं भारी ना पड़ जाए इसलिए कोशिशें तो हो रही हैं उन्हें मनाने की परंतु फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ गड़बड़ तो है जो रह-रह कर सामने आ ही जाती है।
ऊपरी तौर पर असंतुष्टों के तेवर कुछ ठंडे पड़ रहे हैं लेकिन कांग्रेस से दलबदल कर भाजपा में आए नेताओं को तवज्जो मिलने को लेकर ही उनके बड़े सवाल हैं। 26 उपचुनाव क्षेत्रों में तो नाराजगी है ही भाजपा के उन नेताओं में जो 2018 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार थे, जिनसे वे हारे थे उनका अब प्रचार करने को लेकर कुछ ना कुछ अनमने नजर आ रहे हैं। कुछ मुखर हैं तो बहुत से मन मसोसकर बैठे हुए हैं। जहां तक ग्वालियर-चंबल संभाग का सवाल है वहां चुप्पी साधे बैठे नेताओं की संख्या कहीं बहुत अधिक है उनसे जो किसी ना किसी बहाने अपनी नाराजगी का इजहार कर देते हैं।भाजपा को बड़े पैमाने पर रूठों को मनाने की मशक्कत करना पड़ेगी और प्रदेश अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस दिशा में प्रयास भी प्रारंभ कर दिए हैं। चाहे ग्वालियर के भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया हों या मालवा अंचल के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी या कोई अन्य नेता सभी पार्टी के भीतर पैदा हुई संवादहीनता से आहत हैं। दीपक जोशी मानते हैं कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी में संवादहीनता की स्थिति है और साथ में यह भी कहते हैं कि शायद इसका कारण पार्टी का व्यापक होता स्वरूप हो। अनूप मिश्रा का कहना है कि हम लड़ेंगे लेकिन पार्टी के भीतर। जो भी बात है उस पर बंद कमरे में सुलह कर लेंगे। हम चाहते हैं कि पार्टी में संपर्क, सहयोग और संवाद बना रहे। नाराज चल रहे नेता पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा के नेतृत्व में एकजुट हो रहे हैं। शर्मा का कहना है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ता संवाद तथा संपर्क के अभाव मे असहज अनुभव ना करें, उनकी उपेक्षा ना हो। इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत ने हमारी बात को स्वीकार किया है। इस प्रकार गेंद अब इन शुभचिंतकों ने संगठन के पाले में डाल दी है और देखने वाली बात यही होगी शुभचिंतकों की चिंता का निवारण पार्टी कब तक करती ?
भाजपा ने ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए अपने दिग्गज नेताओं की सक्रियता की सीमा रेखा एक प्रकार से खींचते हुए उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि अब बड़े नेता पूरे संभाग में या हर सीट पर नहीं घूमेंगे तथा वह केवल अपने ’प्रभार’ की सीट पर ही फोकस करेंगे। इससे कुछ पार्टी के नेता अपने आपको असहज महसूस कर रहे हैं लेकिन पार्टी इनको ज्यादा आजादी देने के पक्ष में नहीं है। इस अंचल में ज्योतिरादित्य सिंधिया फैक्टर पर ही केंद्रित रहने की कोशिश हो रही है। ग्वालियर में हुए दो दिन के राजनीतिक मंथन का निचोड़ यही है शिवराज-ज्योतिरादित्य की नीति पर ही आगे बढ़ा जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में रहकर दो दिन तक सिंधिया सहित अन्य नेताओं से उपचुनावों को लेकर लंबी मंत्रणा की उसमें यही बात उभर कर सामने आई कि कांग्रेस से भाजपा में आए और भाजपा के पुराने नेताओं के घालमेल से चुनाव को यथासंभव बचाया जाए। जैसा कि दावा किया जा रहा है कि हजारों की संख्या में कांग्रेस से भाजपा में तीन दिन के सदस्यता अभियान में नेता और कार्यकर्ता आए हैं और चुनावों में भी वही भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जो मार्च 2020 के पहले तक खाँटी कांग्रेसी थे।
और अंत में……..
पूर्व मंत्री तथा वरिष्ठ भाजपा नेता जयभान सिंह पवैया के एक ट्वीट को कांग्रेस नेताओं ने हाथों हाथ लिया और पवैया का इशारा किस तरफ है उसका खुलासा करने का अनुरोध किया। पवैया ने आज ट्वीट किया- सांप की तो दो जीभ होती है और आदमी की एक, सौभाग्य से हम मनुष्य हैं ना। राजनीति में वक्त के साथ दोस्त और दुश्मन तो बदल सकते हैं लेकिन जो सैद्धांतिक मुद्दे मेरे लिए कल थे वे आज भी है। जय श्री राम। इस पर प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने ट्वीट में लिखा- कुछ सांप दोनों तरफ से खा सकते हैं वे केंचुली भी छोड़ देते हैं, आपके हिसाब से दोमुंहा सांप कौन हैं? ग्वालियर-चंबल अंचल के कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने पवैया को खुद्दार-मर्द निरूपित करते हुए पवैया की मर्दानगी व अदम्य साहस को सलाम करते हुए सलाह दी कि मित्रों से कह दो दोमुंहे सांपों से बचें।
