0 पीएमएलए प्रावधानों की वैधता पर करेगा विचार, 6 को सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल की उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ‘टुकड़ों-टुकड़ों में जांच’ और अलग-अलग चार्जशीट दाखिल करने की प्रवृत्ति को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उन्हें पहले हाईकोर्ट या ट्रायल कोर्ट का रुख करने को कहा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बघेल की प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 50 और 63 को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और इसे 6 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने टिप्पणी की-हाईकोर्ट और स्पेशल कोर्ट किसलिए हैं? ये समस्याएं सिर्फ तभी उठती हैं जब कोई प्रभावशाली व्यक्ति होता है। अगर ऐसा चलता रहा तो आम नागरिकों और वकीलों की सुप्रीम कोर्ट में कोई जगह नहीं बचेगी।
उन्होंने बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, जिन्हें ईडी ने 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था, को भी पहले हाईकोर्ट में अपील करने की सलाह दी।
भूपेश बघेल की याचिका के मुताबिक इन धाराओं के तहत ईडी किसी भी व्यक्ति को तलब कर सकती है और बयान देने या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य कर सकती है, साथ ही जवाबों पर दस्तखत करवाने की बाध्यता होती है। याचिका का तर्क है कि ये प्रावधान व्यक्ति के मौन रहने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं और व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर करते हैं। इसलिए अदालत से अनुरोध किया गया है कि ईडी को चार्जशीट दाखिल करने के बाद ‘फिर से जांच’ करने की शक्ति न दी जाए, जब तक कि विशेष परिस्थितियाँ न हों और कोर्ट की अनुमति न मिले।