रायपुर/ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अभी देश में जो हालात है पूरे चिंतित और पूरे विश्व को और देश को झकझोर कर देने वाली घटना पहलगाम में हुआ। पहलगाम के आतंकी हमला में 28 लोगो की जाने चली गयी और हंसता खेलता परिवार उजड़ गया। जो परिवार खुशियां बांटने गया था, पर्यटन के लिये गये थे, कोई शादी का सालगिरह मनाने गया था, कोई अपने परिवार के साथ गये थे उनकी बहुत ही दर्दनाक ढंग से आंतकवादियों ने हत्या की है। इस घटना की कांग्रेस पार्टी ने कड़ी शब्दो में निंदा की है। पहलगाम की घटना में बहुत सारे प्रश्न छोड़ गये है। यह बहुत बड़ी घटना है और इस घटना की गंभीरता इससे लगाया जा सकता है पूरे देश के 140 करोड़ जनता इससे व्यतीत है, दुखी है, आक्रोशित है। विश्व के अनेक राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी इस घटना में शोक व्यक्त किया है। आज ही सीडब्लूसी की बैठक हुयी उसमें भी प्रस्ताव पारित किया गया। कल भी मेरे निवास में पूर्व मंत्रीगण, विधायक एवं पूर्व विधायक गण कांग्रेस के कार्यकर्ता पदाधिकारीगण सभी उपस्थित थे। वहां मेरे निवास में दो मिनट का मौन श्रद्धांजलि अर्पित किया। जितने भी घायल व्यक्ति है वो भी जल्द से जल्द स्वस्थ हो यही कामना करता हूं।
पहली बात यह है कि ये आंतकवाद ने हम सब को झकझोर कर दिया है जो 28 लोगो की मौत हुयी है, दूसरी बात यह है कि इसमें धर्म पूछ-पूछकर हत्या की गयी, वहां जो पिट्ठू वाले, टट्टू घोड़े चला रहे थे और जो होटल वाले थे, जो टैक्सी वाले थे, उन्होंने मानवीयता का उत्कृष्ट उदाहरण दिया कि जितने भी प्रभावित परिवार के लोग फंसे हुये थे उनको सुरक्षित स्थान में लाने के लिये अपनी जान की परवाह न करते हुये अपने जान को जोखिम में डालते हुये सहायता की और उसमें दो लोगो की मौत हुयी। बहुत सारे लोग ऐसे थे जो जंगल में छुपे हुये थे, आये नदी, पहाड़ क्रास करके और वहां अपने घरो में उनको आश्रय दिया। तो दूसरा पहलू भी हमको दिखाई देता है, क्योंकि हम लोग भी छत्तीसगढ़ से है नक्सल प्रभाव से पीड़ित है, बहुत सारे नक्सली घटनायें हुयी जिसमें अनको परिजनों और अपने परिचितो को खोया है और हमने अपने नेताओं को खोया है। उस आतंकी और नक्सली हमला के बारे में बहुत करीब से अनुभव कर सकते है। ऐसे ही झीरम घाटी की जो घटना घटी थी और पहलगाम की जो घटना है जिसमें दो समानताएं देखने को मिलता है। पहली समानता यह है कि दोनों जगह सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, न ही पहलगाम सुरक्षा व्यवस्था थी और न ही झीरम घाटी में सुरक्षा व्यवस्था थी। पहलगाम में भी 28 लोगों की मौतें हुयी और झीरम घाटी में भी 28 लोगों की मौतें हुयी। दूसरा समानता यह है कि झीरम घाटी में नाम पूछ-पूछकर नक्सलियों ने मारा है। इसमें नंदकुमार पटेल कौन है, दिनेश पटेल कौन है, महेंद्र कर्मा कौन है, बंटी कौन है ये सब पूछ-पूछकर उनकी हत्याये की। पहलगाम में हुये हमले में धर्म पूछ-पूछकर हत्याएं की। नक्सली बम ब्लास्ट करते है या अंधाधुंध फायरिंग करते है। आतंकवादी का काम भी उसी तरह का है वो दहशतगर्दी है। चाहे बमबारी करे, चाहे गोलीबारी करे। झीरम घाटी में नक्सली रूक कर बैठे रहे उनको मालूम था सुरक्षा बल इनकी सहायता के लिए नहीं आयेंगे। पहलगाम की घटना है यात्रियों को, पर्यटकों का नाम और धर्म पूछ-पूछकर गोली मारे गये। यहां भी पुलिस बल और सैनिक उनकी सहायता में नहीं आयेंगे, ये विश्वास कैसे आया, ये प्रश्न वाचक चिन्ह है। झीरम घाटी की घटना को ताजा कर दिया। देश में जो रिएक्शन आ रहा है बेहद दुखद है। भारतीय जनता पार्टी के लोग आपदा में अवसर तलाशने का काम कर रहे है। जितने भी राजनीतिक दल के नेता है सभी ने इस घटना की कड़ी निंदा की। क्षेत्रीय दल हो या राष्ट्रीय दल हो सबने इस घड़ी में शोक व्यक्त किया। सभी ने एकजुट होकर सरकार को समर्थन देने की बात ने कही। इस अवसर पर हम सब सरकार के साथ है। दुर्भाग्यजनक है कि भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया में जिस प्रकार की बातें कही, जिस प्रकार प्रचारित करने की कोशिश की। सभी मीडिया में धर्म पूछ-पूछकर हत्याएं की गयी, जाति नहीं पूछा। किसी ने भी सवाल नहीं उठाया कि इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी? सुरक्षा वहां क्यों नहीं था? इंटेलिजेंस की भूमिका क्या रही? इसके पहले प्रधानमंत्री का दौरा था, स्थगित हुआ। उसके पहले गृह मंत्री ने कश्मीर के मामले में समीक्षा बैठक की। ये सब होने के बाद भी इतनी बड़ी घटना कैसे घट गयी, इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सरकार को जवाबदेही तय करना चाहिए। सवाल 28 जाने कहां है? हमारे बीच में थे कहां है? उनको न्याय कब मिलेगा? चाहे कोई भी कार्यवाही करे, जवाबदारी तय करनी पड़ेगी। पूरे देश, सरकार के साथ है। लेकिन ये बताए इस चूक की जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर हुआ उसके लिए जिम्मेदार कौन है? सहायता नहीं पहुंची उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का उत्तर कौन देगा?
