नोएडा। बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स के तत्वावधान में साहित्य की दुनिया में उपलब्धियां पाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकारों को सातवें बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स साहित्यकार सम्मान समारोह से सम्मानित किया गया। इनमें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गिरीश पंकज को वेदव्यास, दिविक रमेश को महाकवि कालिदास और संतोष श्रीवास्तव को वागेश्वरी सम्मान से नवाजा गया।
नोएडा के समीप मयूर विहार स्थित होटल क्राउन प्लाजा में शनिवार को आयोजित सम्मान समारोह में देश विदेश से पधारे नामचीन साहित्यकारों में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल, पूर्व जस्टिस एस एन श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथिगण चंद्रप्रकाश देवल, सुशील त्रिवेदी, प्रकाश मनु, यू जी ब्रह्म, मुकेश भारद्वाज, प्रेम जनमेजय, संतोष खन्ना और श्याम सखा श्याम आदि को सम्मानित किया गया।
अलंकरण समारोह में क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान में सी पी देवल को राजस्थानी, यू जी ब्रम्ह को बोडो भाषा का विशेष शिखर सम्मान के साथ ही 25 साहित्य विभूषण सम्मान, 30 साहित्य भूषण सम्मान, 45 साहित्य रत्न सम्मान के अतिरिक्त 2 बीपीए रत्न सम्मान, 3 कथा बिंब पुरस्कार एवं 2 अनुस्वार रत्न, 2 बीपीए समाज और 5 कला रत्न पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
साहित्यकारों के उत्कृष्ट योगदान को बढ़ावा
इस मौके पर बीपीए फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. संजीव कुमार ने कहा कि पुरस्कारों का उद्देश्य उन साहित्यकारों के उत्कृष्ट योगदान और उपलब्धियों को पहचानना है जिन्होंने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति के साथ अतुलनीय सेवाएं दी हैं। आयोजन में संस्था की निदेशक डॉ. मनोरमा, कामिनी मिश्रा, प्रमोद मिश्रा, पीयूष शुक्ला आदि का सहयोग रहा।
साहित्यकारों का सम्मान अभूतपूर्व
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल ने सभी को आशीर्वाद दिया। अध्यक्ष पूर्व हाईकोर्ट जस्टिस एस एन श्रीवास्तव ने कहा कि लेखकों का सम्मान अभूतपूर्व है। साहित्यकार प्रेम जनमेजय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन रणविजय राव और पूनम माठिया और मनीषा चौगावकर ने किया।
किताबें जीवन में रोशनी देती है
इस मौके पर साहित्यकार ममता कालिया ने कहा कि हम सब यंत्र में बदल गए हैं। हमारा देश ज्ञान, संस्कृति, भाषा, प्रेम और मानवता के लिए जाना जाता है। किताबें जीवन में रोशनी देती रहती है।युवाओं को प्रेमचंद, अज्ञेय जैसे लेखकों की ऐसी पुस्तके पढ़नी चाहिए जिनसे जीवन में संसार खड़ा होता है। वेद व्यास सम्मान से सम्मानित साहित्यकार डॉ.गिरीश पंकज ने कहा कि सम्मान से मैं अभिभूत हूं।
संस्था का आभारी हूं। कई प्रदेशों के साहित्यकारों का कुंभ है। हाईटेक युग में अब सभी सिखाने वाले लोग हैं। लेखकों को मौलिकता का ध्यान रखना होगा। चैट जीपीटी के सहारे न रहें। मौलिक रहेंगे तो तभी अच्छे लेखक बन सकते हो।
महाकवि कालिदास पुरस्कार से सम्मानित दिविक रमेश ने कहा कि सम्मान से पहचान मिलती है, इससे भी बड़ा सम्मान होगा कि पाठक रचनाओं को पढ़ें। सम्मान का असली उद्देश्य है कि रचना पाठकों को प्रेरित कर दे। साहित्यकार सी पी देवल ने कहा कि हिंदी के साथ अन्य भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित करना सराहनीय है। पत्रिका विधि नायक और अनुस्वार का भी लोकार्पण हुआ।
साहित्यकारों में मुकेश भारद्वाज, नंद भारद्वाज, शैलेंद्र कुमार शर्मा, तेजिंदर शर्मा, प्रमोद गोविल, रोहित कुमार, दीनदयाल शर्मा, प्रेम वीर, ममता किरण, नूतन पांडेय, महेश कटारे, मधु कांत, रूबी मोहंती, दीर्घ नारायण, सुधा आदेश, राघवेश अस्थाना, पीयूष शुक्ला, यशपाल सिंह बुंदेला, आलोक शुक्ला, पल्लवी लोहनी और मन्नू यादव आदि मौजूद रहे जिन्हें पुरस्कृत किया गया।