
0 मृत्युंजय चतुर्वेदी द्वारा
मनेद्रगढ़। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक पुंज है। यह गीत भारत के स्वाभिमान गौरव और एकता का प्रतीक भी है।उक्ताशय के विचार हिंदी साहित्य भारती के जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय, वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वी स्थापना दिवस के परिप्रेक्ष्य में व्यक्त कर रहे थे। शासकीय माध्यमिक शाला रापाखेड़ा में छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के परिपालन में आयोजित वंदे मातरम गान महोत्सव , के गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सेवानिवृत्त व्याख्याता मनोहर लाल खियानी उपस्थित थे। वंदे मातरम गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं इसके महत्व पर शिक्षिका कीर्ति रानी गुप्ता, लक्ष्मी चक्रधारी ने महत्वपूर्ण जानकारी छात्रों को दी। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता सतीश उपाध्याय ने वंदे मातरम गीत को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताते हुए कहा कि यह गीत भारतीयों में आत्मविश्वास बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाता है उन्होंने कहा कि इस गीत की लोकप्रियता ब्रिटिश काल में कितनी बढ़ गई थी कि स्वतंत्रता संग्राम के समय इस गीत को गाने वाले लोगों को जेल भेज दिया जाता था, वंदे मातरम को भारतीय साहित्य की अद्वितीय रचना बताते हुए उन्होंने वंदे मातरम गीत की उत्पत्ति और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की, एवं वंदे मातरम का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रधान पाठक शिव मूर्ति सिंह श्रीमती भी रत्ना , श्रीमती गायत्री मिश्रा, श्रीमती उर्मिला चंद्र, कीर्ति रानी गुप्ता, लक्ष्मी चक्रधारी ,सुश्री दीपा पांडे ,श्रीमती किरण दुबे ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गान कर भारत माता की जय का उद्घोष कर , माध्यमिक शाला रूपा खेड़ा के एक-एक विद्यार्थियों के मन में देश के प्रति सम्मान का भाव जगा दिया। आमंत्रित अतिथियों का आभार प्रदर्शन प्रधान पाठक एस एम सिंह, ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि मनोहर लाल ज्ञानी ने छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के तहत संचालक लोक शिक्षण संचनालय नया रायपुर के उस आदेश की प्रशंसा की जिसके तहत 24 जनवरी को छत्तीसगढ़ के समस्त स्कूलों में वंदे मातरम गीत गायन एवं इसकी पृष्ठभूमि बताने का आदेश और निर्देश जारी किया गया है ।कार्यक्रम का संचालन सतीश उपाध्याय द्वारा किया गया। अंत में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सामूहिक गण एवं भारत माता की जय के साथ कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गई।
