0 संजीव वर्मा
प्रदेश में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का ऐलान हो गया है। निर्वाचन आयोग ने दोनों चुनाव एक साथ कराने का निर्णय लिया है। यह चुनाव सिर्फ 35 दिनों में संपन्न होगा। खास बात यह है कि राज्य बनने के बाद यह पहली बार है, जब प्रदेश में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव दोनों एक साथ होगा। इसके तहत् एक देश-एक चुनाव की तर्ज पर प्रदेश में एक राज्य-एक चुनाव की अवधारणा पूरी होती दिख रही है। आयोग के मुताबिक चुनाव के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद इस सबसे महत्वपूर्ण चुनाव के लिए राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा में एक बार फिर शह और मात का खेल शुरू हो गया है। शहरी और ग्रामीण सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों दल कमर कस चुके हैं। जनता को भी इसका बेसब्री से इंतजार है। इस बार का चुनाव पिछले चुनाव से कई मायनों में अलग है। पिछली बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। इस बार भाजपा सत्ता पर काबिज है। भाजपा ने नगरीय निकाय चुनाव प्रणाली में बदलाव कर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का निर्णय लिया है। जबकि पिछली बार अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव हुआ था। दरअसल, भाजपा को लगता है कि प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले चुनाव में उसे फायदा मिलेगा। काफी हद तक यह सच भी है। प्रदेश और केंद्र दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है। यानी राज्य में डबल इंजन की सरकार है। शहरी क्षेत्रों में महापौर और अध्यक्ष के चुनाव में वह अपने 1 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के सामने तो रखेगी ही साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के चेहरे का भी वह लाभ लेना चाहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस राज्य सरकार के एक वर्ष की नाकामियों को जनता के सामने रखने का निर्णय किया है और वह उसी के आधार पर जनता से वोट मांगेगी। जहां तक तैयारियों का सवाल है तो भाजपा काफी आगे है। वह पिछले 6 महीनों से निकाय चुनाव की तैयारियों में जुट गई थी। न केवल स्थानीय नेता बल्कि केंद्रीय मंत्री और संगठन के कई नेता लगातार राज्य का दौरा कर पार्टी को मजबूती देने के साथ ही प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को रणनीति के अनुरूप काम करने का निर्देश देते रहे हैं। जबकि कांग्रेस में स्थिति ठीक इसके उलट दिख रही है। प्रदेश प्रभारी महासचिव सचिन पायलट कब आते हैं, कब जाते हैं, किसी को पता ही नहीं चलता। बीच-बीच में प्रभारी सचिव संपत कुमार और विजय जांगिड़ के आने की खबरें मिलती रही है। बैठक भी लेते रहे हैं, लेकिन जिस ढंग से भाजपा की तैयारी दिख रही है, कांग्रेस उससे मीलों पीछे हैं। खैर, यह उन दोनों पार्टियों का अंदरूनी मामला है। वे ज्यादा जानते हैं कि उनकी तैयारी कैसे और किस स्तर पर है, लेकिन जो दिख रहा है और जनता जो महसूस कर रही है वह सामने है। पिछली बार के चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश के सभी नगर निगमों में कब्जा जमाया था। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी कांग्रेस का वर्चस्व था। लेकिन इस बार स्थिति उसके अनुकूल नहीं दिख रही है। प्रदेश के 10 नगर निगम, 49 नगर पालिकाओं और 114 नगर पंचायतों में महापौर और अध्यक्ष पदों के लिए सीधे चुनाव होंगे। जबकि 33 जिला, 140 जनपद और 11672 ग्राम पंचायत में चुनाव कराए जाएंगे। कांग्रेस चुनाव की तारीखों से संतुष्ट नहीं है। उसने नगरीय निकाय और पंचायत के चुनाव परिणाम की तिथि पर आपत्ति जताई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि जब चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित किए गए हैं तो दोनों के परिणाम एक साथ घोषित किए जाने चाहिए। इस संबंध में प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र भी लिखा है। बहरहाल, दोनों दल प्रत्याशी चयन सहित चुनाव की रणनीति और अन्य तैयारियों में जोर-जोर से जुट गए हैं। बैठकों का दौर लगातार जारी है। प्रत्याशी चयन को लेकर अभी दोनों दल की ओर से कोई मापदंड तय नहीं किया गया है। देखना होगा किसकी किस्मत खुलेगी और कौन प्रत्याशी होगा? आम जनता को भी इसका इंतजार है। आखिर लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है। आखिरी फैसला उसी का होगा।
