
0 न समझ आए तो भी सुनो केवल तुम्हारे कानों में बात पहुंच जाए तो कल्याण हो जायेगा*
0 जैनम मानस भवन में आज से प्रारंभ हुई सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा*
रायपुर। ऊं नमो: भगवते वासुदेवाय,प्रणाम…जय सियाराम..जय श्रीकृष्णा के साथ भगवताचार्य श्री रमेश भाई ओझा ने श्रीमद भागवत कथा की शुरुआत जैनम मानस भवन में गुरुवार की शाम करते हुए कहा कि रायपुर छत्तीसगढ़ वालों के लिए सौभाग्य की बात है कि ईशा का नववर्ष प्रारंभ हुआ है और दूसरे ही दिन कथा सत्संग करने का यह अवसर मिला। हमारी सनातनी परम्परा-हमारी प्राचीन परम्परा है कि चैत्र में हमारा नव वर्ष प्रारंभ होता है। हमारे सनातन धर्म के अनुसार समयकाल तो परमात्मा का है जो अविनाशी है अखंड है। आप अपनी मान्यता के अनुसार नव वर्ष को जब भी प्रारंभ माने, सबकी स्वतंत्रता है। मुख्य बात ये है कि हमे कुछ नया करने का अवसर मिलता है। एक मौका मिलता है अपने जीवन में बदलाव लेकर आने का। काल में क्या नया क्या पुराना, जो पैदा होता है उसका नाश भी तय है। पुराना साल हो जाता है शरीर नहीं। भगवान को भजते हो तो नया बनने का मौका मिलता है। नए साल का मुहूर्त केवल उतना ही बना लो। बीत गई सो बात गई..।अब उसको याद कर रोते रहोगे ये कहां की बात हुई? श्रीमद्भागवत कथा में न छिलका है – न गुठली केवल रस ही रस है। जिस प्रकार नदियों में गंगा श्रेष्ठ हैं वैसे ही पुराणों में श्रीमद्भागवत कथा। वेद व्यास ने पुराणो के माध्य से इसे बहुत ही सरल बना दिया है।
श्री ओझा ने कहा कि शोक में फंसे नहीं रहे, जीवन शैली में बदलाव लाते हुए ये तय कर लो कि कोई बुरी चीज नहीं करूंगा। लेकिन शुरु-शुरु में तो करते हैं पर जैसे ही समय बीतते जाता है पकड़ ढीली होने लगती है और फिर वहीं चले आते हैं। नया साल एक संकल्प हैं कुछ नया दृढ़ संकल्प लेने का। भगवान की कृपा से श्रीमद्भागवत कथा सुनने का यह अवसर मिला है। इन सात दिनों में जीवन में बहुत कुछ बदलाव ला सकते हैं,दिव्य बना सकते हैं, व्यवहार में, आध्यात्मिक उन्नति हो सकती है यदि आपका मन लगे तो..? उन्होने कहा कि सोशल मीडिया से कुछ देर के लिए दूरी बनाकर यदि श्रीमद्भागवत कथा का एक अध्याय या गीता का एक श्लोक पढ़ लें तो भी बहुत है। अच्छी पुस्तकें पढ़ूंगा ये प्रयास करो, लोग पढ़े हुए तो हैं पर पढऩा बंद कर दिया है। वकील, डाक्टर्स यहां तक कि हम लोगों को भी स्वाध्याय करना अनिवार्य है।
उन्होने आलस्य व प्रमाद में भेद बताते हुए कहा कि जब लक्ष्य को भूल जाते हैं और विस्मृति आ जाती है तो यह प्रमाद है। रूचि का अभाव है यह। आलस्य का मतलब ये हैं कि याद तो हैं कि क्या करना है लेकिन आज की जगह कल पर टाल देते हैं। व्याकरण के आचार्य भी कहते हैं जो आज करना है वो कल पर क्यों टालते हैं। हम ये भी जानते हैं कि ऐसा करने से हमारा कल्याण होगा, भला होगा फिर भी कल पर टाल देते हैं। रस का अभाव हैं इसलिए कल पर टालने की बात आती है। जहां रस आ जाता है, रूचि आ जाती है। वहां आनंद का अनुभव करते हैं। भगवान तो आपको चांस देते हैं, कृपा करते हैं तब कथा सुनने का अवसर मिलता है। नहीं तो क्या टीवी खोलो कई सारे चैनल चल रहे हैं पांच सात बाबाओं की कथा मिल जायेगी। कितने सत्संग मिल जायेंगे। लेकिन स्वंय व्यास भगवान ने लिखा है कि कथा दुर्लभ है। लेकिन पढ़े लिखे लोग सवाल करते हैं कि इसमें दुर्लभ जैसी कोई बात नहीं है। भागवत तो तुम्हारे घर पर भी हैं पर पढ़ते हैं क्या? मन में रूचि नहीं है इसलिए यह तुम्हारे लिए दुर्लभ है। जब कथा में बैठते हैं तब मन को सब याद आता है,तीन घंटे बैठकर भी यदि तीन मिनट की कथा आत्मसात कर ली तो जीवन में बदलाव तय है। जीवन में आचरण में उतार लिया तो भगवान सभी विकारों को हर लेते हैं।
गंगा और श्रीमद्भागवत कथा की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए उन्होने कहा कि हरिदर, ऋषिकेश, काशी में रहने वालों के लिए गंगा क्या दुर्लभ है लेकिन रोज कितने लोग गंगा में डुबकी लगाते हैं? जल तुम्हारा जीवन हैं पियोगे नहीं तो जियोगे कैसे। भागवत कथा में भी गंगा प्रवाहित हो रही है। गंगा का जल अपने आप में औषधि है। गंगा में तरलता है, मधुरता है,निर्मलता है,वैसे ही यह कथा भी तरल है। ये कोई कठोर पदार्थ नहीं हैं. कथा अमृत है, इसमें न छिलका है- न गुठली केवल रस ही रस है। कथा बड़ी ही सरल है, हर कोई इसे पी सकता है। कोई कठिन बात नहीं, कठिन बातों को वक्ता सरल बना कर आपको श्रवण कराते हैं। वेद उपनिषेदों की बातें भागवत के माध्यम से कही जाती है। न समझ आए तो भी सुनो केवल तुम्हारे कानों में बात पहुंच जाए तो कल्याण हो जायेगा।
*गंगा के प्रदूषण पर जतायी चिंता*
श्री रमेश भाई ओझा ने गंगा के प्रदूषित होने पर भी कथा के दौरान चिंता जतायी, इसे प्रदूषित हम मानव लोगों ने ही किया है। हम भी यह प्रण कर लें कि कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे गंगा प्रदूषित हो। हवा प्रदूषित हो। कोविडकाल की याद कराते हुए उन्होने कहा कि तब दिल्ली वालों को भी दिल्ली से हिमालय नजर आता था आज दिल्ली में सांस ले पाना मुश्किल हो रहा है। फिर भी गंगा तो गंगा है।
*आजकल कुछ कथाएं भी प्रदूषित हो रही हैं*
सांकेतिक रूप में रमेश भाई ओझा ने यह भी कहा कि आजकल कुछ कथाएं भी प्रदूषित होने लगी है जो कि ठीक नहीं। है, इसकी निर्मलता, पवित्रता बनी रहे। ये प्रदूषित न हो इसकी सुरक्षा की भी बहुत आवश्यकता है। यह जिम्मा व्यासपीठ के साथ आयोजकों की भी है।
*श्रीमद्भागवत कथा के लिए निकली भव्य शोभायात्रा*
गुरुवार से जैनम मानस भवन में प्रारंभ श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के लिए सुबह 11 बजे एक भव्य शोभायात्रा वीआईपी रोड व जैनम मानस भवन के मोड़ से प्रारंभ होकर कथा स्थल पहुंची। भागवत पोथी को मिरानी परिवार के सदस्य सिर पर विराजित कर श्रद्धाभाव से चल रहे थे। मार्ग पर लगातार प्रभु के जयकारे लग रहे थे, पुष्प वर्षा से मुख्यद्वार पर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में भगवताचार्य श्री रमेश भाई ओझा,परम पूज्य गोस्वामी 108 श्री द्वारकेश लाल जी महाराज, श्री मगनभाई राज्य गुरु (पूज्य बापजी), मिरानी परिवार के सदस्य व श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में शामिल थे। शाम चार बजे दीप प्रज्जवलन के साथ व्यासपीठ की स्थापना भी मंत्रोचार के बीच की गई।
