0 संजीव वर्मा
प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हो गया है। इस एक साल में राज्य सरकार कितनी सफल रही और उसकी क्या उपलब्धियां रही इसका आकलन तो जनता करेगी लेकिन बीते एक साल में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘हमने बनाया है तो हम ही सवारेंगे’ के नारे को चरितार्थ करने का प्रयास ज़रूर किया है। उन्होंने इस धारणा को भी ख़त्म करने का प्रयास किया है कि वे एक सख्त प्रशासक नहीं है। उन्होंने अपनी छवि के अनुरूप साफ़-सुथरे और सुलझे हुए राजनीतिज्ञ के रूप में पहचान तो बनाई ही है, विकास का एक ऐसा रोड मैप भी बनाया है कि राज्य सतत विकास की ओर अग्रसर हो सके। सरकार ने अपने संकल्प पत्र के वादे के अनुरूप कई बड़े फैसले भी लिए हैं। इनमें महतारी वंदन योजना के तहत राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपए की राशि का अंतरण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। महतारी वंदन योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपनी छोटी-छोटी ज़रूरतों को पूरी कर सकें। यह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा क़दम माना जा रहा है। वहीं, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फ़ीसदी सीटें आरक्षित कर यह बताने की कोशिश की गई है कि वह अपने वादे पर अटल हैं। सुरक्षा के क्षेत्र में नक्सलवाद के खात्मे के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है कि राज्य सरकार नक्सली उन्मूलन को लेकर कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती। नक्सलवाद के खिलाफ़ अभियान में सरकार को बड़ी सफलता भी मिली है। पिछले एक साल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 213 नक्सली मारे गए हैं और करीब 1750 नक्सलियों ने या तो आत्म समर्पण किया है या फिर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। वहीं, बस्तर के अंदरूनी गांवों में लोकतंत्र और विकास की किरणों को पहुंचाने के लिए नियद नेल्लानार योजना शुरू की गई है। इसका अच्छा प्रतिसाद भी मिल रहा है। इसी कड़ी में बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का सफल प्रयास किया गया है। यानी राज्य सरकार अपने एक साल के छोटे से कार्यकाल में बस्तर को नक्सल मुक्त करने में काफी हद तक सफल रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर कहा है कि 31 मार्च 2026 से पहले देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी भी दी है कि वे हथियार डालकर समाज की मुख्य धारा में वापस लौट जाएं नहीं तो सुरक्षा बल उन्हें निपटा देंगे। इसके अलावा सरकार ने ‘विकसित भारत- विकसित छत्तीसगढ़ विजन- 2047’ को ध्यान में रखकर कई अन्य बड़ी परियोजनाओं पर भी काम शुरू किया है। इनमें रेलवे, सड़क, एयरपोर्ट तथा अधोसंरचना के काम प्रमुख हैं। आर्थिक विकास पर भी सरकार का फोकस रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर उसने समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मंशा से कई काम किए है। आदिवासी क्षेत्रों में वनोपज की खरीदी एक बड़ा मुद्दा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण के पारिश्रमिक में 4000 रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 5500 रुपए किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार 300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार वहन कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख परिवारों को पक्के आवास देने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए किस्तों में राशि दी जा रही है और आवास भी बनाए जा रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बड़ी समस्या रही है। सरकार ने इस दिशा में भी कई क़दम उठाए हैं। मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ाई गई है। कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर- चांपा और गीदम जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में नया मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है। राज्य में अब 14 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। इसका सीधा लाभ न केवल आम जनता को मिलेगा बल्कि युवाओं के लिए भी मेडिकल शिक्षा के नए द्वार खुलेंगे। वहीं, सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी भी अपने वादे के मुताबिक कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी सरकार के कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया है। उन्होंने एक साल की उपलब्धियों की जानकारी दी और कहा कि हमारी सरकार का पहला साल ‘विश्वास’ का रहा है। हालांकि यह जनता को तय करना है कि साय सरकार के ‘विश्वास के इस पहले साल’ पर वह कितना ‘विश्वास’ करती है। बहरहाल, राज्य सरकार ने अपने एक साल के कार्यकाल को ‘सुशासन का एक साल, छत्तीसगढ़ हुआ खुशहाल’ का नारा दिया है। हालांकि एक साल किसी भी सरकार के लिए बेहद कम समय होता है। उसे अभी 4 साल का लंबा सफर तय करना है। चूंकि केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि विकास के रास्ते में कोई रोड़े नहीं आएंगे और डबल इंजन की विष्णु देव साय की यह सरकार प्रदेश में विकास का नया आयाम गढ़ेगी।