पत्रकार मनीष रैकवार नहीं रहे, छोटी बेटी ने मुखाग्नि दी

0 मृत्युंजय चतुर्वेदी द्वारा

मनेन्द्रगढ़। करोना काल से लगभग चार वर्षों से भी अधिक समय से लकवा जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार मनीष रैकवार ने रविवार की दोपहर इस नश्वर संसार से अंतिम विदा ली ।दूसरे दिन उनकी दोनों बेटियों ने पिता को कन्धा देकर अन्य लोगों के साथ अपने पिता को मुक्तिधाम पहुंचा कर पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम अंतिम विदाई देते हुए अग्नि संस्कार की रिति निभाई । स्वर्गीय मनीष रैकवार हमेशा से अपनी दोनों बेटियों को बेटों की तरह पाला जिसको याद उनकी मंशा के अनुरूप छोटी बेटी ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

ज्ञात हो 50वर्षीय मनीष रैकवार प्रारम्भिक जीवन काल से ही संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए इस दौरान विभिन्न समाचार पत्रों में जुड़कर समाचार लिखना प्रारंभ किया था । इसी बीच मनीष ने बिलासपुर से प्रकाशित समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दीं।कोरोना काल के पूर्व अचानक उनकी तबियत ख़राब होने के कारण परिवार के लोगों ने कई जगह उनका उपचार कराया परंतु उनके स्वास्थ्य में किसी प्रकार का सुधार नहीं हो पाया । धीरे धीरे मनीष चलने फिरने में भी आसक्त हो गये। परंतु मनीष ने इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद भी हार नहीं मानी और जीवन से संघर्ष करते रहे । घर में बैठे बैठे मनीष ने अपनी पत्नी के सहयोग से लगातार संघर्ष जारी रखा। गंभीर बीमारी से जूझने के वावजूद भी मनीष के चेहरे में कभी सिकन नहीं दिखाई दी। दोनों बेटियों के उच्च शिक्षा के लिए बिलासपुर व रायपुर में दाखिला दिलाया। आखिरकार दीपावली के बाद भाई दूज के दिन मनीष रैकवार ने लगभग दोपहर 2:30बजे अंतिम सांस ली ।सोमवार को छोटी बेटी मानसी रैकवार ने अपने पिता को मुखाग्नि दे उन्हें अंतिम विदाई दी। इस मौके पर क्षेत्र के पत्रकार व गणमान्य जन उपस्थित रहे।