भारतीय खेल एवं योग कार्यशाला में शिक्षक कन्हैया साहू शामिल हुए

भाटापारा। स्वदेशी खेल एवं योग को बढ़ावा देने श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल में कार्यशाला का आयोजन हुआ। यह कार्यशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में रखा गया था जिसमें छत्तीसगढ़, गोवा और मध्यप्रदेश से चयनित बीस-बीस शिक्षक उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान परिषद के इस क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के परिसर में यह आवासीय कार्यशाला ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के संदर्भित रखा गया था। ‘कार्यशाला का आयोजन 10 फरवरी से 14 फरवरी तक ‘ट्रेनिंग ऑफ के.आर.पी ऑफ वेस्टर्न रीजन ऑन इंडीजीनयस स्पोर्ट्स एंड योग विथ रिफ्रेंस टू एन.ई.पी 2020’ के नाम से किया गया। के.आर. पी के रूप में प्रशिक्षित सभी साठ शिक्षक मास्टर ट्रेनर्स बनकर अपने प्रांत एवं जिलों में प्रशिक्षण प्रदान करने की जिम्मेदारी निभाएँगे। छत्तीसगढ़ राज्य से राज्य शैक्षणिक अंनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर के निर्देशक श्री ज्ञान प्रकाश द्विवेदी सर जी द्वारा योग, खेल और विषय के शिक्षकों को चयन कर इस कार्यक्रम हेतु भेजा गया था। बस्तर से व्याख्याता समीर मिश्रा, शिक्षक शिवराम मौर्या, बलौदाबाजार से सहायक शिक्षक कन्हैया साहू ‘अमित’, महासमुंद से प्रधानपाठक रेखा ध्रुव, दुर्ग से सहा. शिक्षक वर्षा यादव, गरियाबंद से व्याख्याता चित्ररेखा नागेश, धमतरी से खेल शिक्षक गोपिका बारिक, व्याख्याता राजेश तिवारी, कोंडागांव से व्याख्याता कमलेश साहू, बस्तर से सहा.शिक्षक प्रेमलता साहू, दुर्ग से शिक्षक सुशील ठाकुर, बेमेतरा से सहा. शिक्षक ढालसिंह यादव, कबीरधाम से शिक्षक सतीश तिवारी, नारायण पांडे, मीनाक्षी चौरिया, मनेंद्रगढ़ से प्रधानपाठक विश्वजीत पटेल, कांकेर से प्रणब कीर्तनिया, अमिताभ सरकार, जाँजगीर से खेल शिक्षक हितेश तिवारी, खैरागढ़ से व्याख्याता मानस साहू उपस्थित हुए। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल के प्रोफेसर डाँ. महेन्द्र बरूआ जी इस कार्यक्रम के संयोजक थे। इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में देश के ख्यातिप्राप्त शारीरिक शिक्षा संस्थान ग्वालियर, गुवाहाटी, दिल्ली, मेरठ, बिलासपुर, भोपाल से प्रशिक्षक आये हुए थे। विषय विशेषज्ञ पूरे पाँच दिनों तक प्रतिदिन तीन सैद्धांतिक कक्षा और दो-तीन प्रायोगिक कक्षाएँ लेते थे।

पाँच दिन चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय खेलों पर सविस्तार चर्चाएँ हुई तथा इन्हें पुनर्स्थापित करने की बात कही गई। स्वदेशी खेलों के रूप में प्रसिद्ध खो-खो, कबड्डी, मलखंभ, रस्साकशी, सुतोनिया, पित्तूल, लंगड़ी, आत्या-पात्या, लागोरी के साथ-साथ कुछ माईनर गेम्स भी खिलाए गए। भारतीय योग दर्शन पर भी सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक कक्षाएँ लगाई गई। इसके साथ ही भारतीय पारंपरिक खेल, आष्टांग योग, खेल प्रशिक्षण प्रबंधन, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी, स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स, एनाटॉमी, स्वास्थ्य शिक्षा, टूर्नामेंट फिक्सचर, टीचिंग एप्टीट्यूड, क्लास मेनेजमेंट, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग जैसे विभिन्न संदर्भित विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।