त्वरित टिप्पणी: ‘राम काज कीन्हे बिनु हमें कहाँ बिश्राम’

छत्तीसगढ़ की नई भाजपा सरकार का पहला बजट वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में पेश किया। आगामी लोकसभा चुनाव की छाया में नए करों से मुक्त इस बजट पर सरसरी नजर डाला जाए तो इसमें ‘मोदी की गारंटी’ पर फोकस किया गया है। साथ ही 10 आधारभूत रणनीतिक स्तंभ के साथ पेश इस बजट में गरीब, युवा, किसान और महिलाएं इसके केंद्र बिन्दु में है। बजट में युवाओं के लिए पुरस्कार से लेकर गरीबों के लिए आवास तक की बात कही गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, जल जीवन मिशन, तेंदूपत्ता, संग्राहकों को बोनस, दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना और श्री रामलला दर्शन के लिए बजट में अच्छा खासा प्रावधान किया गया है। उसके अलावा छत्तीसगढ़ उद्यम क्रांति योजना तथा राज्य के 5 शक्ति पीठों के विकास की विस्तृत योजना बनाने के लिए भी बजट में प्रावधान है। एक लाख 47 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग में 112 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। जबकि पीएचई में 97, खनिज साधन में 8, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में 70, स्वास्थ्य विभाग में 37, कृषि में 33, ऊर्जा में 20 और गृह विभाग में 16 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वित्तमंत्री ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। बजट में नए करों को शामिल नहीं किया, लेकिन यह सच है कि राज्य के तीव्र विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए करों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुराना अनुभव बताता है कि जिस भी राज्य ने लोकलुभावन व मुफ्त की नीति को अपनाया, कालांतर में उसकी आर्थिक सेहत प्रभावित हुई है। ऐसे में इस बजट में मुफ्त की रेवड़ी से बचने का प्रयास किया गया है। बजट में छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ स्मार्ट गवर्नेस तथा छत्तीसगढ़ आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन करने की घोषणा भी महत्वपूर्ण है। राज्य में छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन योजना लागू करने तथा छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीआईटी) और छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (सिम्स) सभी लोकसभा क्षेत्र और संभाग में स्थापित किए जाने का भी ऐलान किया गया है। साथ ही बजट में कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं भी समाहित हैं। लेकिन इसका क्रियान्वयन ईमानदारी से हो तो राज्य तेजी से विकास की ओर अग्रसर होगा। अधोसंरचना पर ध्यान देने की जरूरत है। केंद्र सरकार से रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री सड़क योजना तथा शिक्षा से संबंधित कई योजनाएं चल रही है। इसके लिए भरपूर राशि भी मिलती है। लेकिन कई योजनाओं की राशि ही खर्च नहीं हो पाती जो एक प्रशासनिक अक्षमता है। उसे दूर किया जाना चाहिए। साथ ही यदि भ्रष्टाचार को रोक सकें और पारदर्शिता के साथ कार्य करें तो राज्य के विकास को कोई नहीं रोक पाएगा। बहरहाल, वित्तमंत्री ने अपने बजट को अमृतकाल के नींव का बजट करार देते हुए एक विकसित राज्य के रूप में उभरने की दृष्टि से सभी क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए एक नवंबर 2024 तक ”अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन@2047″ तैयार करने की बात कही है। उनके भाषम से साफ है कि उन्होंने इसके जरिए सबको साधने की कोशिश की है। लेकिन उनके सामने वित्तीय अनुशासन के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरा करने की एक अहम् चुनौती भी है। इसीलिए उन्होंने अपने बजट भाषण के अंत में कहा भी है कि-
”राम काज कीन्हे बिनु हमें कहाँ बिश्राम”