आपकी बात: प्रधानमंत्री जी..! यह कैसी राजनीति?

0 संजीव वर्मा

मणिपुर करीब तीन महीने से जातीय हिंसा की चपेट में है। लेकिन देश के प्रधानमंत्री (कर्णधार) की नजरें मणिपुर की ओर इनायत नहीं हुई। अलबत्ता, जब हैवानियत की सारी हदें पार हो गई तब उनकी निंद्रा टूटी और उसमें भी राजनीति की बूँ आने लगी। उन्होंने कहा कि ‘मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, क्रोध से भरा है। मणिपुर की जो घटना सामने आई हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली है। 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घटना चाहे राजस्थान की हो, छत्तीसगढ़ की हो या मणिपुर की हो, इस देश में राजनीति और वाद विवाद से ऊपर उठकर नारी का सम्मान सबसे पहले है। किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा। एक ओर तो प्रधानमंत्री ने राजनीति से उपर उठने की बात कही है तो दूसरी ओर वह छत्तीसगढ़ का नाम लेकर राजनीति करने से बाज नहीं आए। यह कैसी पीड़ा और कैसा क्रोध है, जिसमें राजनीति कूट-कूट कर भरी हुई है। आश्चर्य होता है जब देश के संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति इस तरह की बातें करते हैं। जहां तक छत्तीसगढ़ का सवाल है तो यहां अब तक ऐसी कोई घटनाएं नहीं हुई है, जिसकी तुलना मणिपुर से की जा सके। छत्तीसगढ़ एक शांत,सभ्य और शालीन प्रदेश है, जहां लोग सांप्रदायिक सद्भाव, भाईचारा और मिलजुल कर रहने में विश्वास रखते हैं। ऐसे में मणिपुर जैसी घटना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री के द्वारा मणिपुर की छत्तीसगढ़ से तुलना करना समझ से परे हैं। सीधा-सीधा यह छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता के स्वाभिमान पर चोट है, प्रदेश का अपमान है। जिसे किसी कीमत पर भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति कुछ कहता है तो उसके मायने होते हैं। उनके बयान को पूरी गंभीरता से लिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि वे कुछ कह रहे हैं तो सच्चाई होगी। ऐसे में छत्तीसगढ़ के बारे में नकारात्मक बातें कहकर प्रधानमंत्री ने क्या संदेश देने की कोशिश की है, यह बड़ा सवाल है। वैसे देखा जाए तो प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह संतोषप्रद है। हाल-फिलहाल किसी तरह की ऐसी कोई घटनाएं नहीं हुई है, जिससे कहा जाए कि प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पिछले एक-दो महीने के भीतर स्वयं प्रधानमंत्री सहित, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा और कई केंद्रीय मंत्री छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए लेकिन कानून व्यवस्था पर कभी भी सवाल खड़े नहीं किए। फिर अचानक प्रधानमंत्री का मणिपुर में महिलाओं से दरिंदगी की घटना की छत्तीसगढ़ से तुलना करना लोगों को खटक रहा है। हमारा मानना है कि प्रधानमंत्री का इस तरह तुलना करना पूरी तरह राजनीतिक है। चूंकि इस साल के अंत में छत्तीसगढ़ सहित 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैें। उनमें राजस्थान भी शामिल है। ऐसे में इसके पीछे की मंशा को समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री के बयान पर छत्तीसगढ़ में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे प्रदेश का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीने से मणिपुर जल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक वक्तव्य भी नहीं दिया। जब बयान दिया तो छत्तीसगढ़ और राजस्थान को भी जोड़ दिया। एक तो पहली बार मीडिया के सामने आए और झूठ बोलकर गए। ये जुमलेबाजी बंद कीजिए प्रधानमंत्री जी! जो जिम्मेदारी आपकी है उसका निर्वहन कीजिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लोगों को मणिपुर मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहते हैं। वह मणिपुर की तुलना ऐसे राज्य से कर रहे हैं जो शांतिपूर्ण है। मणिपुर में जो हो रहा है वह अलग बात है। इसकी तुलना छत्तीसगढ़ से नहीं की जा सकती। छत्तीसगढ़ को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।