ट्रेनों की लेटलतीफी आम, यात्रियों में रोष

भाटापारा। गाड़ियों की लेटलतीफी से यात्रियों को निजात नहीं मिल पा रही है।  यात्रीगण ज्यादा दुखी हो गए है। शुक्रवार को हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग आने वाली छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस इस समाचार के लिखे जाने तक लगभग 11 घंटे लेट से चल रही थी। आश्चर्य इस बात का है कि पिछले लगभग 8 महीनों से ट्रेनों की लेटलतीफी बेहद आम बात हो गई है। ना तो रेलवे के अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं ना उनको इससे कोई मतलब है और ऊपर से रेल मंत्रालय भी चुप्पी साधे बैठा हुआ है। देश के रेल मंत्री क्या कर रहे हैं। पहले तो उन्होंने कहा था कि गाड़ियां लेट होंगी तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, परंतु कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और गाड़ियों की लेटलतीफी क्यों बंद नहीं हो रही है, इसको कौन बताएगा। देश के नागरिकों के लिए बड़ी बड़ी बात बड़ी बड़ी सुविधा देने की बात राजनीतिक दल के लोग और सरकार में बैठे लोग करते हैं। परंतु हकीकत कुछ और ही है। रायपुर, भाटापारा और बिलासपुर से गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनें लेट चल रही है। यदि पिछले 6 माह का भी रिकॉर्ड उठाकर रेलवे स्वयं देखता है कि कितने दिन कौन सी ट्रेन राइट टाइम चली है तो उसे खुद अपने आप पर शर्म आ जाएगी। यात्रियों में इसको लेकर अत्यधिक नाराजगी है। आने वाले समय में विधानसभा के चुनाव भी है और लोकसभा के चुनाव भी यात्रियों का गुस्सा चुनाव पर भी निकल सकता है। लेट चलने वाली गाड़ियों में संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के अतिरिक्त कुर्ला शालीमार एक्सप्रेस, आजाद हिंद एक्सप्रेस, बरौनी एक्सप्रेस, दानापुर एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, शिवनाथ एक्सप्रेस, अहमदाबाद एक्सप्रेस ऐसी तमाम गाड़ियां हैं जो सही समय पर नहीं चल पा रही है। स्टेशन पर यात्रियों से चर्चा करने पर यात्रियों ने गाड़ियों की लेटलतीफी पर काफी रोष जताया है और कहा है कि पिछले एक ,दो साल से ट्रेन अधिकांशत लेट चल रही है। जिससे यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यात्री कुछ सोच कर घर से निकलता है और ट्रेनें लेट होने के बाद उसके सारे कार्यक्रम, प्रोग्राम बिगड़ जाते हैं। सरकार को, रेल मंत्रालय को, रेलवे बोर्ड को और बिलासपुर रेलवे जोन के अधिकारियों को इस और विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए कि ट्रेनें सही समय पर चल सके।