0 संजीव वर्मा
छत्तीसगढ़ राज्य में अब युवाओं के सपनों को लगेंगे पंख । जी हां..! छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण रद्द करने के बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आरक्षण को लेकर न केवल राज्य सरकार को बल्कि राज्य के लाखों युवाओं को बड़ी राहत मिली है। हालांकि इस पर अंतिम सुनवाई जुलाई में होगी। तब तक 58% आरक्षण की व्यवस्था राज्य में फिर से लागू हो गई है। इसी आरक्षण के आधार पर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में भर्ती, पदोन्नति और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में अब उन परीक्षाओं के परिणाम भी जारी किए जाएंगे जो आरक्षण को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद रुके हुए थे। दरअसल राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 2012 में प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किया था। राज्य में 50% की जगह 58% आरक्षण लागू किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में अनुसूचित जाति को 12,अनुसूचित जनजाति को 32 और अन्य पिछड़े वर्ग को 14% आरक्षण दिया जा रहा था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद सितंबर 2022 में हाई कोर्ट ने आरक्षण को असंवैधानिक मानते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद राज्य में आरक्षण 50% हो गया था। इसी समय से राज्य में सभी नई भर्तियों पर रोक लग गई थी। राज्य के लाखों छात्र-छात्राओं और बेरोजगार युवा इस फैसले से परेशान थे। वे सरकारी भर्तियां जल्द से जल्द शुरू करने की मांग कर रहे थे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नौकरियों के द्वार खुल गए हैं। भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस की राज्य सरकार ने फैसला आने के बाद जो तत्परता दिखाई है वह भी युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्काल उच्च स्तरीय बैठक कर सभी भर्तियों को मिशन मोड पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल यह युवाओं के लिए अच्छी खबर है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा इस पर भी राजनीति करने से नहीं चूक रहे हैं। भले ही दोनों दलों ने इसका स्वागत किया है लेकिन एक – दूसरे पर कटाक्ष कर रहे हैं। भाजपा ने इस फैसले को अपनी वैचारिक जीत बताया है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है। भाजपा ने बहुत सोच विचार कर 58% आरक्षण लागू किया था। सुप्रीम कोर्ट में यह वैध साबित हुआ है। इसका हम स्वागत करते हैं। उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के खिलाफ भाजपा के षड्यंत्र के विरुद्ध हमारा संघर्ष जारी रहेगा। राज्यपाल नए विधेयक पर हस्ताक्षर करें तभी सही न्याय मिलेगा। दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में 2 दिसंबर 2022 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों-अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था। इसमें अनुसूचित जनजाति को 32, अनुसूचित जाति को 13, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और अनारक्षित वर्ग के गरीबों को 4% आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। नए विधेयक में आरक्षण 58 से बढ़कर 76% हो गया है। इस विधेयक को अब तक राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। इस पर भी जमकर राजनीति हो रही है। बहरहाल, सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद पिछले 6 महीने से जो परेशानी बनी हुई थी वह दूर हो गई है। इससे राज्य सरकार को भी राहत मिलेगी, जो चुनावी साल होने के कारण विपक्ष के निशाने पर थी।