रुक्मणी विवाह, सुदामा चरित्र व फूलों की होली के भक्तिमय रंग में रंगा धुर्राबाँधा

भाटापारा। ग्राम धुर्राबाँधा के ग्राम पटेल सुखरत्न वर्मा सरपंच हेमंत वर्मा के निवास में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भक्ति की बयार बह रही है जिसमे कथा व्यास के रूप में भाटापारा निवासी पंडित हरगोपाल शर्मा द्वारा अपनी सुमधुर वाणी से भगवान की पावन कथा का रसपान जनमानस को कराया जा रहा है जिसे सुन श्रोता भक्ति की गंगा में डुबकी लगा रहे है पंडित हरगोपाल शर्मा जी ने कथा के माध्यम से सूर्यवंश व चंद्रवंश की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूर्यवंश में भगवान सूर्यनारायण से लेकर भगवान राम तक का जन्म यज्ञ के द्वारा ही हुआ और चंद्रवंश में चंद्रमा से लेकर द्वारिकाधीश तक ऐसा कोई विवाह नही हुआ जिसमें विवाद नही हुआ हो । रुक्मणी विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि रुक्मणी जी ने भगवान द्वारिकाधीश को कभी देखा नही था बचपन मे नारद जी के मुख से भगवान की सुंदरता व उनकी उदारता की कथा सुनी थी बस उसी दिन से उन्होंने मन मे भगवान को पति मान लिया था ये बचपन मे किये सत्संग व संतो के सानिध्य का प्रभाव था कि उन्हें द्वारिकाधीश पति के रूप में प्राप्त हुए । रुक्मणी विवाह की कथा में सुंदर भजनों के बीच भक्त अपने आपको नाचने से नही रोक पाये । सुदामा जी कथा सुनकर लोगों के नेत्र सजल हो गए पंडित हरगोपाल शर्मा ने कहा की सुदामा जी के बारे में लोगों के मन मे कुछ भ्रांति है शास्त्र में कुछ लिखा है लोग कुछ बोलते है सुदामा जी ने जीवन मे एक बार भी भिक्षा मांगी हो व सुदामा दरिद्र था ऐसा किसी शास्त्र में नही लिखा है ।ब्राह्मण अगर भिक्षा मांगता है तो उसका ब्राह्मणत्व नष्ट हो जाता है दान लेने का अधिकार ब्राह्मण को है भिक्षा मांगने का नही। गरीब होना अलग बात है दरिद्र होना अलग , दरिद्र वह है जो असंतोषी है ।शर्माजी ने कथा के माध्यम के भगवान के दिव्य चरित्रों को सुनाकर पूरा वातावरण ही भक्तिमय बना दिया ।श्याम मित्र मंडल के गिरधर व्यास व संजय शर्मा के द्वारा प्रसंगों के अनुरूप गाये सुमधुर भजनों पर श्रोतागण भावविहोर होकर झूमते रहे । कथा श्रवण करने आसपास के गांव के साथ ही भाटापारा से सैकड़ों लोगों का प्रतिदिन आना जाना लगा रहा। कथा में विशेष रूप से थानखम्हरिया से आचार्य ओमप्रकाश जोशी, विधायक शिवरतन शर्मा,मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा , सुनील माहेश्वरी ,सतीश अग्रवाल, सरिता ठाकुर, कमलेश देवांगन,भरत वर्मा,परमेश्वर वर्मा,सहित राजनीतिक ,धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं जय भोले कांवरिया संघ, संगीतमय सुंदरकांड पाठ समिति, पंचमुखी सुंदरकांड पाठ समिति के प्रतिनिधि भी प्रति दिवस कथा सुनने कथा स्थल पहुचते रहे। कथा विश्राम दिवस पर आज ठाकुर जी के साथ फूलों की होली खेली गई जिसमें होली के गीतों में लोग झूमते हुए एक दूसरे पर फूल बरसाते रहे । कथा में परायण कर्ता के रूप में दिनु महराज थे अंत मे पूरे वर्मा परिवार व ग्रामवासियों द्वारा कथा व्यास पंडित हरगोपाल शर्मा को ससम्मान बिदाई दी गई ।