कांग्रेस में युवा नेतृत्व के दावे और उसे हवा देती भाजपा

0 अरुण पटेल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के सांसद बेटे नकुलनाथ के द्वारा उपचुनावों में युवाओं का नेतृत्व करने और उसके बाद उनके समर्थकों द्वारा उन्हें युवा आईकॉन संबोधित करने को लेकर वर्षों से पार्टी के अंदर संघर्ष कर उभरे युवा नेताओं में भले ही अभी सीधे टकराव की नौबत ना आई हो परंतु उनके समर्थकों में नाराजी  देखी जा रही है। अपने-अपने  युवा नेताओं को युवा आइकॉन मानते हुए उनके समर्थन में सोशल मीडिया के माध्यम से इशारों-इशारों में अपनी बात कुछ इस ढंग से कहने की होड़ लग गई है जिससे लगे कि उनका युवा नेता ही असली युवा आइकॉन है। यदि कहीं कोई बात सीधे निशाने पर लग जाए तो  तुरंत भी संभाल लेते हैं। नकुलनाथ का वीडियो वायरल होने के बाद जीतू पटवारी के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर नारा दे दिया ‘ना राजा ना व्यापारी- अबकी बार जीतू पटवारी ” परिवारवाद कोरोना से बड़ी बीमारी -अबकी बार जीतू पटवारी।’ जीतू ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यह मेरे किसी समर्थक ने नहीं किया है यह किसी भाजपा वाले ने किया है।
केवल बात युवा आईकॉन तक होती तो अलग था पर अब तो समर्थक उनका जो युवा आईकॉन है उसे भावी मुख्यमंत्री तक के बताने लगे हैं। भले ही अभी खुलकर टकराव की नौबत ना आई हो लेकिन अंदरखाने रार पैदा होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। कांग्रेस भले यह मानकर चल रही हो कि चुनावों के बाद कमलनाथ फिर से मुख्यमंत्री होंगे, किंतु अभी तो यही तय नहीं है कि उपचुनाव के बाद कांग्रेस का मुख्यमंत्री होगा भी या नहीं पर भावी मुख्यमंत्री को लेकर अभी से सोशल मीडिया में पोस्ट होने लगी हैं। भाजपा नेता यह जानते हैं की युवा नेताओं में कांग्रेस के अंदर जितनी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी उतना ही उसे उपचुनावों में फायदा मिलेगा, इसलिए वह हवा देने लगी है ताकि आपस में कांग्रेस के युवा नेताओं में टकराव की स्थिति पैदा हो जाए।
युवा नेतृत्व की लाइन में पहले से ही जयवर्धन सिंह, जीतू पटवारी, कुणाल चौधरी, सचिन यादव, कमलेश्वर पटेल तो हैं ही आदिवासी चेहरों में ओमकार सिंह मरकाम, उमंग सिंघार, सुरेंद्र सिंह बघेल भी अपने आपको दावेदार समझते हैं। इनके बीच अचानक नकुलनाथ के द्वारा स्वयं ही युवाओं का नेतृत्व करने की बात कहने के बाद युवा नेताओं में वर्चस्व को लेकर जंग छिड़ने की नौबत आ सकती है। समय रहते इन हालातों पर नेतृत्व ने पहल कर सभी युवाओं को, जो दावेदार हैं विश्वास में नहीं लिया तो फिर कांग्रेस को खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच अहम और मान सम्मान की टकराहट के चलते डेढ़ दशक बाद सत्ता में आई कांग्रेस के हाथ से सत्ता फिसल गई और यदि युवाओं में भी टकराहट के हालात पैदा हो गए तो फिर उपचुनावों  के बाद फिर से सरकार बनाने के दावे महज दावे बनकर न रह जाएं। कुणाल चौधरी और जीतू पटवारी ने 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले  प्रदेशव्यापी अनेक यात्राएं निकाल कर युवाओं को सक्रिय किया गया था और युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कुणाल चौधरी ने काफी संघर्ष भी किया था। संघर्ष किसी ने किया और फसल काटने कोई और आ गया इसकी अभिव्यक्ति प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से विदाई के समय अरुण यादव ने की थी। यादव का कहना था कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में लाठियां हमने खाईं ,संगठन को मजबूत किया और जब फसल काटने का मौका आया तो वरिष्ठ नेता टपक पड़े। उनका सीधा-सीधा इशारा कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने और ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाने की ओर था। नकुलनाथ प्रदेश से कांग्रेस के इकलौते लोकसभा सदस्य हैं इसलिए उन्होंने युवाओं का नेतृत्व करने की बात कह दी हो लेकिन उनके हाथों में युवाओं की कमान देना कमलनाथ के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि युवाओं की एक लंबी कतार है जिनमें से अनेकों ने अपनी जगह खुद संघर्ष करके बनाई है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, कमलेश्वर पटेल और ओमकार सिंह मरकाम राहुल गांधी की टीम में रह चुके हैं। कांग्रेस में उभरते युवा नेताओं को यदि कमलनाथ एकजुट कर सके तो कांग्रेस मजबूती से उपचुनावों में खड़ी हो सकती है  पर सवाल यही है कि क्या ऐसा हो पाएगा?
और अंत में……….
युवा कांग्रेस नेताओं के बीच रस्साकशी और बढ़े इसको हवा देने का कोई मौका भाजपा हाथ से नहीं जाने देती। शिवराज सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई पर तंज करते हुए ट्वीट कर सवाल किया तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रि-ट्वीट कर दिया। भूपेंद्र सिंह ने सभी  पोस्टरों को मिलाकर ट्वीट किया कि ‘जयवर्धन के समर्थक उनको भावी मुख्यमंत्री बना चुके हैं। नकुलनाथ को पिता का आदेश है की प्रदेश संभालो और ना राजा ना व्यापारी कह रहे हैं जीतू पटवारी’। भूपेंद्र सिंह ने सवाल किया कि चुनाव से पहले ही युवा कांग्रेसियों ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को वानप्रस्थ भेजने का मन बना लिया है।
——-

Leave a Reply