भाटापारा। कोयला संकट के नाम पर 24 जून तक यात्री ट्रेनों को निरस्त किए जाने और जो ट्रेनें चल रही है उसमें से अधिकतर ट्रेनें काफी विलंब से चल रही है जिससे यात्रियों में काफी रोष पनप रहा है। यात्रियों में सरकार के और रेल विभाग के रवैया के प्रति नाराजगी है। सरकार की मनमानी और रेल विभाग की मनमानी के सामने यात्री बेबस हैं। राजनेता भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। छत्तीसगढ़ में कुल 11 सांसद हैं जिसमें से 9 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं, जिनकी केंद्र में सरकार है। इसके बावजूद सांसदों के द्वारा इस मामले में कुछ नहीं किया जाना जनता के प्रति अन्याय है। खास बात यह है कि लोकल ट्रेन है जिसमें मध्यमवर्ग गरीब तबके के लोग सफर करते हैं। इन दिनों ज्यादातर रद्द चल रही है। इस मामले में स्टेशन में यात्रियों से बातचीत करने पर यात्रियों ने इसे आम जनता के साथ क्रूर मजाक बताया है। भारत जैसे देश में आवागमन के लिए सबसे सस्ता सुगम व सरल साधन रेल ही है । रेल प्रशासन के द्वारा फिर से ट्रेनों को रद्द किए जाने से आम नागरिकों की दिनचर्या के साथ-साथ उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ है। भाटापारा से लगे छोटे-छोटे स्टेशनों के लोग भाटापारा रोजाना आना-जाना करते हैं। भाटापारा के लोग भी रोजगार की तलाश में रायपुर व बिलासपुर प्रतिदिन आना-जाना करते हैं, किंतु ट्रेनों की लेटलतीफी और ट्रेनों के निरस्त होने की वजह से काफी परेशानियों के दौर से गुजर रहे हैं। लोकल एवं पैसेंजर ट्रेनों के रद्द होने से गांव के लोगों पर सीधा असर पड़ा है। उनका दुख-दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। नेता भी अपने मतलब की ही बात करते हैं। डोंगरगढ़, रायपुर, बिलासपुर लोकल एवं रायपुर, बिलासपुर लोकल तथा झारसुगुड़ा, गोंदिया पैसेंजर ट्रेन इन दिनों रद्द है। जिसे छोटे-छोटे स्टेशनों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इतवारी टाटानगर को रेल विभाग पैसेंजर के रूप में ही चलाएं
इतवारी टाटानगर पैसेंजर को एक्सप्रेस के रूप में रेल विभाग जरूर चला रहा है, परंतु इसका लाभ छोटे-छोटे स्टेशनों के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में यह ट्रेन पैसेंजर के रूप में चलती थी, तब सभी स्टेशनों में इसका स्टॉपेज हुआ करता था। किंतु वर्तमान में रेल विभाग द्वारा इसे एक्सप्रेस ग्रुप में चलाया जा रहा है, जिससे अनेक स्टेशनों में स्थाई स्टॉपेज नहीं है। यात्रियों ने और छोटे-छोटे स्टेशन में रहने वाले लोगों ने रेलवे से यह मांग की है कि इसे पैसेंजर के रूप में ही पूर्व की भांति चलाया जाए।
क्या कर रहे हैं सांसद महोदय गण
छत्तीसगढ़ में कुल 11 सांसद हैं जिसमें से 9 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं, जबकि मात्र दो सांसद कांग्रेस पार्टी के हैं। ऐसे में लोगों ने यह सवाल उठाया है कि छत्तीसगढ़ के हित के लिए विशेषकर ट्रेनों के मामले में यह सभी 11 सांसद क्या भूमिका अदा कर रहे हैं। लगातार ट्रेनों का रद्द होना और लोकल ट्रेनों को बंद रखना कहां तक उचित है। इसके लिए सांसदों ने अभी तक क्या भूमिका अदा की है। यह सवाल यात्रियों ने उठाया है।
