0 मृत्युंजय चतुर्वेदी द्वारा
मनेंद्रगढ़। जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सोनहरि के ग्राम नगवा आजादी के 73 साल पश्चात भी विकास से कोसों दूर है।आज पर्यंत उस गांव की सुधि लेने वाला कोई जनप्रतिनिधि या यूं कहें कोई पार्टी अभी तक नहीं पहुंच पाई है। मनेंद्रगढ़ से लगभग 40 किलोमीटर दूर जटाशंकर मार्ग पर बसे एक छोटा सा गांव जिसे ग्राम नग़वा के नाम से जाना जाता है, वहां के निवासी आज भी सुविधा विहीन जीवन जीने को मजबूर हैं। बताया जाता है कि नगवा गांव से ग्राम हंसपुर के लिए एक नाले को पार करना पड़ता है, परंतु नगवा निवासियों का दुर्भाग्य ही कहा जाए कि आज पर्यंत तक कोई पुल मार्ग अथवा पुलिया उस नाले पर नहीं बन पाई। जिससे कि वह अपने सुख सुविधा हेतु निकट के किसी कस्बे में जा सके। यहां तक कि बताया जाता है कि गांव नगवा के जितने भी बच्चे हैं वह ग्राम हंसपुर के स्कूल में कक्षा प्रथम से आठवीं तक पढ़ने हेतु जाया करते हैं। परंतु विडंबना ही कहें कि आज भी बच्चे वर्षा के 4 महीने स्कूल का मुंह नहीं देख पाते। कारण की वर्षा ऋतु में नाले में पानी इतना आ जाता है कि वह उसे पार करके स्कूल नहीं जा पाते। यहां तक की अगर वर्षा के दिनों में अगर कोई कीड़ा मकोड़ा सांप बिच्छू किसी को काट लेता है तो उसी ग्राम में वह तड़प तड़प के मर जाता है, परंतु उस नाले के कारण आज भी वह निकट के स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं पहुंच पाता। विडंबना ही कहे की आज उस गांव का सरपंच भी हताश है। कारण कि उसने अपना प्रपोजल जनपद पंचायत में तो बना बना कर दिया पर किसी का सैंक्शन ना आने के कारण वह लोगों से मुंह छुपाते हुए घूमते रहता है। अभी हाल ही में बिहार पुर से नगमा मार्ग जो फॉरेस्ट के अधीन होने के कारण वन विभाग द्वारा बनवाया जा रहा है। वह देखने में ही काफी घटिया और गुणवत्ता विहीन होने के कारण गांव वालों में काफी रोष दिखाई दिया। गांव वाले तो यहां तक बोल रहे हैं कि इससे अच्छा तो हमारा पूरा पुराना सड़क ही था जिससे हम पैदल आ जा सकते थे। परंतु वन विभाग द्वारा बनाए जाने वाला रोड जिसमें मात्र कुछ पत्थर और बगल के कुछ रेतीली मिट्टी डालकर रोड को बनाने का इति श्री किया जा रहा है। नगमा वासियों ने उनमें काम कर रहे कुछ लोगों से जब पूछा कि अगर वर्षा ऋतु आई तो इस रोड पर हम कैसे चलेंगे तो उनका कहना था कि हमें जैसा आदेश मिलता है वैसा ही कार्य करते हैं।आप बाकी बातें उच्च अधिकारियों से संपर्क कर मालूम कर सकते हैं। आज ग्राम नगवा आजादी के 75 वर्ष बाद भी आवागमन विहीन, रात्रि में रोशनी नहीं, क्योंकि उस गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। एक तरफ तो सरकार कहती है कि गांव के दूरस्थ अंचलों में हमें सबसे पहले कार्य करने हैं, परंतु आज ग्राम नगमा की स्थिति देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि राजनीति वालों को राजनीति के अलावा शायद ही कुछ और आता होगा। गांव में सौर ऊर्जा से कुछ घरों को रोशनी दी गई है, परंतु उनके भी बैटरी खराब हो जाने के कारण लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में हम जाएं तो जाएं कहां। जिले के नव पदस्थ कलेक्टर से गांव वालों को एक आस बनी हुई है कि शायद अब कुछ हो सके।
