म्यूकोरमाइकोसिस एक फंगल संक्रमण है जो मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवा ले रहे हैं

भाटापारा। नगर के मध्य स्थित जेके ऑडील हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सक डॉ विकास आडिल ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस एक फंगल संक्रमण है जो मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवा ले रहे हैं. विशेषरूप से स्टेरायड दवा लेने वा जयलों को म्यूकोरमाइकोसिस अधिक प्रभावित करता है. ऐसे व्यक्तियों के साइनस या फेफड़े, हवा से फंगल बीजाणुओं के अंदर जाने के बाद प्रभावित होते हैं. म्यूकोरमाइकोसिस से ग्रस्त होने की संभावना उन लोगों को अधिक होती है जो अनियंत्रित मधुमेह से प्रभावित है. इसके अलावा लंबे समय तक आइसीयू में भर्ती रहे मरीज, अंग प्रत्यारोपण आदि रोगियों को यह बीमारी सबसे अधिक प्रभावित करती है.

आंख व नाक में दर्द व लाली हो तो रहें सावधान

डॉ आडिल ने आगे बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है जिसके चेतावनी के संकेत ओर लक्षणों में आंख और नाक के आसपास दर्द और लाली रहना, बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, खूनी उल्टी व मानसिक स्थिति में बदलाव आना शामिल है.

बचाव के उपायों को अपनायें और लगाये मास्क: डॉक्टर आडिल
चिकित्सक विकास आडिल ने इसके उपायों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विशेष सुरक्षात्मक उपाय अपना कर म्यूकोरमाइकोसिस की रोकथाम की जा सकती है. यदि धूल भरे निर्माण स्थल पर जा रहें हैं तो मास्क का इस्तेमाल अवश्य करें. मिट्टी, बागबानी, काई या खाद आदि से जुड़े काम करते समय जूते, लंबी पैंट, पूरी बाजू वाली कमीज और दस्ताने अवश्य पहनें.
साथ ही मधुमेह पीड़ित लोगों को सावधानी रखने की बात कहते हुए बताया कि कोविड-19 रोगियों सहित मधुमेह रोगियों एवं कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों म्यूकोरमाइकोसिस होने की संभावना अधिक होती है. ऐसे लोगों को यदि नाक में रूकावट या जमाव, नाक से काल और खूनी स्राव, गाल की हड्डी पर दर्द, चेहरे के एक तरफ दर्द, सुन्न ओर सूजन होना, नाक व तालू के उपर कालापन आना, दांत में दर्द, दांतों का ढ़ीला होना, जबड़े में दिक्कत आदि हो तो म्यूकोरमाइकोसिस होने की संभावना बहुत अधिक होती है. इसके अलावा छाती में दर्द और सांस लेने में परेशानी भी म्यूकोरमाइकोसिस होने के लक्षण होते हैं.

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