दुर्ग में ब्लैक फंगस से पीड़ित 18 मरीजों की पुष्टि, इलाज के लिए दवा की कमी, पोस्ट कोविड कंट्रोल रूम स्थापित

दुर्ग। जिला दुर्ग में कोविड-19 के बाद ब्लैक फंगस पैर पसारने लगा है। प्रदेश में सर्वाधिक 18 मरीजों की पुष्टि जिले से हो चुकी है । जिसमें से 9 मरीजों का इलाज एम्स अस्पताल रायपुर में चल रहा है। जबकि सेक्टर 9 अस्पताल 6, बीएम शाह अस्पताल में 2 एवं दुर्ग के निजी अस्पताल में एक मरीज का इलाज चल रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से संबंधित दवा की कमी होना बताया है। साथ ही पोस्ट कोविड कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। विशेष चिकित्सक की भी नियुक्ति कर दी गई है।
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि जिले से अब तक ब्लैक फंगस के 18 संक्रमित मरीजों की पुष्टि की गई है। 11 मई को सेक्टर 9 निवासी 35 वर्षीय युवक श्रीनिवास सभाओं की इस बीमारी से इलाज के दौरान क्षेत्र में अस्पताल में मौत हो चुकी है। इस बीमारी से संबंधित मरीजों का इलाज सेक्टर 9 अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज मे रेफर किए जाने के निर्देश भी सभी अस्पतालों को दिए गए हैं । सभी अस्पतालों को चेतावनी देते हुए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस बीमारी में मुख्य भूमिका नर्सिंग स्टाफ की है। जिसमें साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है।

पोस्ट कोविड कंट्रोल रूम की स्थापना

डॉक्टर ठाकुर ने बताया कि ब्लैक फंगस बीमारी के बचाओ एवं रोकथाम के लिए जिले में पोस्ट कोविड कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। साथ ही पूरे जिले में निगरानी के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति भी कर दी गई है। यह चिकित्सक जिन अस्पतालों में इन मरीजों का इलाज चल रहा है लगातार दौरा कर उचित परामर्श देंगे। ताकि ब्लैक बंदर से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जा सके।

बीमारी के इलाज के लिए दवा उपलब्ध नहीं

डॉ ठाकुर ने बताया कि ब्लैक फंगस बीमारी के इलाज के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग के पास दवाइयां उपलब्ध नहीं है। इसलिए वैकल्पिक दवाइयों का उपयोग किया जा रहा है। इस बीमारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला इंजेक्शन एम्फोटेरिमिन उपलब्ध नहीं है। सेक्टर 9 चिकित्सालय में यह इंजेक्शन उपलब्ध है। परंतु वहां भी इंजेक्शन अब खत्म होने की स्थिति में हैं।

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