रायपुर/ धान खरीदी व धान को सुरक्षित ना रख पाने , समय पर मिलिंग ना कर पाने ,धान के सडऩे व पिछले वर्ष का चावल अब तक जमा ना कर पाने के मुद्दे पर आज सरकार को विधान सभा में भाजपा सदस्यों ने जम कर घेरने का प्रयास किया। मंत्री अमरजीत भगत के जवाबों से असंतुष्ट रहने पर मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कारणों के एक एक बात का खुलासा किया, उन्होंने केंद्र सरकार के असहयोग का भी उल्लेख कर विपक्ष को करारा जवाब दिया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के द्वारा यह गंभीर प्रश्न उठाने पर कहा यह उचित है , इससे अधिकारियों पर दबाव बनता है। लेकिन एथेनॉल प्लांट की अनुमति ना मिल पाने व राजीव न्याय योजना को बोनस बता कर अनुमति में विलंब का उल्लेख भी मुख्य मंत्री ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी गड़बड़ी करने की कोई मंशा नहीं है, अगर आपको हमारे जवाब से संतुष्टि नहीं है तो आप विधानसभा के नियमों की तहत प्रक्रिया में चले जाएं और अगर आप चाहेंगें तो आधा घंटे की चर्चा रख लें हमें एतराज नहीं है। इसके बाद दोनों पक्षो की सहमति के आधार पर उपाध्यक्ष मनोज मंडावी ने धान के विषय पर आधा घंटे की चर्चा को स्वीकृति दे दी।
अपने मूल प्रश्न में अजय चंद्राकर ने पूछा था कि 31.01.21 तक कितने धान की खरीदी हुई है ? कितनी मात्रा में धान की कस्टम मिलिंग हो गई ? कितना धान अभी कस्टम मिलिंग के लिए शेष है ? शेष बचने के क्या कारण हैं ? उसके दोषी कौन हैं ? इस धान की कस्टम मिलिंग कब कर ली जाएगी ? छत्तीसगढ़ में कितनी राइस मिल हैं ? उनमें से कितनी मिलों को खरीफ वर्ष 2019-20 के धान की कस्टम मिलिंग की है ? मिलिंग का भुगतान राशि कितनी है ? उपरोक्त उल्लेखित तिथि तक मिलर्स को कितनी राशि का भुगतान किया गया ? जिलेवार कितनी राशि देना शेष है ? जवाब में मंत्री अमरजीत भगत ने बताया कि विपणन वर्ष 20-21 में चाही गई तिथि तक किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। 32.22 लाख मी.ट. कस्टम मिलिंग की जा चुकी है ,59.78 मीट्रिक टन धान कस्टम मिलिंग हेतु शेष था। वर्तमान खरीफ वर्ष 20-21 में कस्टम मिल्ड चावल जमा करने की तिथि 30.09.21 निर्धारित है। कस्टम मिलिंग कार्य प्रक्रियाधीन है। 19-20 में कुल 1907 पंजीकृत राइस मिलरों द्वारा कस्टम मिलिंग कार्य किया गया है। 31.01.21 तक कुल 335 करोड़ रुपये राइस मिलरों को भुगतान किया गया है। मंत्री अमरजीत भगत ने सदस्यों के पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि जो भी इस सरकार द्वारा किया जाएगा वह नियमानुसार ही किया जाएगा। बहुत सी परेशानियों के बावजूद हम अपना कार्य कर रहे हैं,केंद्र से अनुमति में विलम्ब,बोनस के नाम पर राजीव न्याय योजना पर प्रश्नचिन्ह लगाना ,फिर कोविड 19 की लंबी परेशानी के कारण भी कई कार्य प्रभावित हुए हैं। भगत ने विपक्ष के बार बार दोहराने पर जवाब में बताया गया कि 44000 मी.ट. धान समितियों में कम पाया गया। संग्रहण केंद्र व समितियों में 3 लाख मी. ट. धान पड़ा है। शिवरतन व चंद्राकर ने पूछा कि 44 हजार एमटी धान कम हुआ उसके लिए किस पर कार्यवाही की गई ? उन्होने इस मामले की विधानसभा की समिति से जांच कराने की मांग की। कहा आप पिछले साल का 2 लाख टन चावल जमा नही कर पाए है , पुराना चावल एफसीआई लेगा क्या ? इस प्रश्न पर अपनी बात रखने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नया चावल नहीं खाया जाता एफसीआई भी 3 साल पुराना चावल बांट रही है। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। सेंट्रल की अनुमतियों की तिथियों पर लंबी नोकझोंक के बाद सौरभ सिंह व अजय चंद्राकर ने आरोप लगा दिया कि 1000 करोड़ की गड़बड़ी का मामला है। सरकार कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। हमें संतुष्ट नहीं कर पा रही है ,झूठ पर झूठ बोल रही है। इस पर मो.अकबर ने कहा कि अगर आपको लगता है कि जो कहा जा रहा है , वह असत्य है तो उसके लिए प्रक्रिया है आप उसमे जाईये। आप मंत्री को अपने अनुसार जवाब नहीं कहला सकते। इसके बाद विपक्षी दल भाजपा नारे लगाने लगी,तब मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया और सिलसिलेवार बात बताई और कहा कि आप असंतुष्ट हैं तो आधे घण्टे की चर्चा रख लीजिये हम सहमत हैं। आप भी बोनस देते रहे हैं,और हमने दिया तो बोनस पर रोक की बात की गई। उन्होंने कहा कि मुख्य बात यह है कि हमने 2500 में धान खरीदा तो केन्द्र हमारा चावल नहीं खरीद रहा था हमने जाकर खाद्य मंत्री,कृषि मंत्री अन्य केन्द्रीय मंत्रियों से बात की। स्व. पासवान ने कहा था कि सरकार की नीति है बोनस देने वाले राज्यों से चावल नही लिया जाएगा अन्यथा वे हमारे द्वारा दिए जा रहे भुगतान राशि से सहमत थे। हमने राजीव न्याय योजना के माध्यम से किसानों को राहत दी और धान खरीदी केंद्र द्वारा तय समर्थन मूल्य पर की। तो भी केंद्र सरकार ने इसे बोनस ही माना और अनेक अनुमतियों में अड़ंगा लगाया। हमने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री से अनुमति के लिए भेंट कर अपनी बात रखी और वे 60 लाख मी. टन चावल खरीदने सहमत हुए, लेकिन बाद में अनुमति 24 लाख मी. टन की ही दी गई। मुख्यमंत्री ने भाजपा सदस्यों से कहा कि लकीर के फ़क़ीर मत बनिये। हमारी इस विषय पर राजनीति करने की कतई मंशा नहीं है। राज्य के भले की बात है ,हम चाहते है शेष धान जो बच रहा है उससे एथेनॉल बनाकर राज्य को लाभ पहुंचाएं या तो नीलामी करें जिससे राज्य का नुकसान होगा। केंद्र एथेनॉल बनाने की अनुमति नहीं दे रहा है। सब इस मामले में मिलजुल कर प्रयास करें तो राज्य का भला होगा। अंतत: उपाध्यक्ष मनोज मंडावी द्वारा आधे घंटे की चर्चा स्वीकार करने की घोषणा के बाद भाजपा सदस्य शांत हुए।
