कस्टम मिलिंग से धान का उठाव नहीं होने व धान सड़ने के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा

0 भाजपा सदस्यों ने सदन की कमेटी से जांच कराने की मांग की
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन विपक्षी दल भाजपा ने  किसानों से जुड़ा कस्टम मिलिंग से धान का उठाव नहीं होने व करोड़ों का धान सड़ने का मुद्दा जोरशोर से उठाया। इस मुद्दे पर भाजपा सदस्यों ने सदन की कमेटी से जांच कराने की मांग की। इस पर खाद्य मंत्री द्वारा आश्वासन नहीं मिलने पर भाजपा सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
प्रश्रकाल में आज भाजपा सदस्य रजनीश कुमार सिंह ने पिछले वित्तीय वर्ष में कस्टम मिलिंग से देरी से धान उठाव का मामला उठाया। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने इसका जवाब देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर सहकारी समितियों के माध्यम से क्रय किये गये। धान में से 11 दिसंबर 2020 की स्थिति में खरीदी केन्द्रों में धान शेष नहीं है।  उन्होंने बताया कि 541 राईस मिलर्स द्वारा कस्टम मिलिंग का चावल दिया जाना शेष है। अन्य एक प्रश्र के उत्तर में खाद्य मंत्री ने बताया कि खरीफ वर्ष 2019-20 में खरीदे गये धान की कस्टम मिलिंग प्रचलित है। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र से अनुमति देरी से मिलने और कोरोना संक्रमण की वजह से धान उठाव में देरी हुई। 31 दिसंबर तक हमारे पास समय है।
इस पर पूरक प्रश्र करते हुए भाजपा सदस्य रजनीश सिंह ने  कहा कि जहां-जहां धान रखा है वहां लगभग 800 करोड़ रूपये का धान सड़ चुका है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी इस मामले में कहा कि 800 करोड़ नहीं बल्कि 50 हजार करोड़ रूपये का धान सड़ चुका है। भाजपा सदस्यों ने इस मामले में सदन की कमेटी से जांच कराये जाने की मांग की है, जिसमें सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के विधायकों को भी शामिल करने की मांग की। इस पर खाद्य मंत्री अमरजीत भगत द्वारा कोई आश्वास नहीं मिला, जिसके बाद भाजपा सदस्यों ने हंगामा करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

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