छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद की अटकलों पर लगता विराम

0 अरुण पटेल

15 साल के बाद जब छत्तीसगढ़ में भारी भरकम बहुमत के साथ 2018 में कांग्रेस ने चुनाव जीता उस समय तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद के दो दावेदार बनकर उभरे थे तथा इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत तथा तत्कालीन सांसद ताम्रध्वज साहू के बीच रस्साकशी चल रही थी। अंततः तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भूपेश बघेल के नाम पर मोहर लगाई। महंत को विधानसभा अध्यक्ष तथा सिंहदेव और साहू को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उस समय राजनीतिक गलियारों में इस बात की अटकलें थीं कि बघेल और सिंहदेव को ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मिलेगा। हालांकि किसी भी कांग्रेस नेता ने या हाईकमांड के सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि ऐसा कोई फार्मूला बना है लेकिन इस प्रकार की चर्चा जोरों पर थी कि मुख्यमंत्री आधे-आधे कार्यकाल के लिए दोनों नेता रहेंगे। मीडिया के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बीते सप्ताह सिंहदेव ने उत्तर दिया उसका अर्थ यही लगाया गया कि मुख्यमंत्री पद की अदला बदली हो सकती है। अटकलों को भाजपा नेताओं ने भी हवा देने में एक क्षण की भी देरी नहीं की, सरगुजा दौरे पर जाने से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टीएस सिंहदेव के मुख्यमंत्री पद को लेकर दो दिन पहले दिए बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे डाली। बघेल ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि अगर आलाकमान कहेगा तो वे फौरन इस्तीफा दे देंगे, लेकिन अगर कोई गलतफहमी पैदा करता है, चाहे वो कोई भी हो, उसे सचेत रहना चाहिए कि वह प्रदेश का हित नहीं कर रहा है। सरगुजा रवाना होने से पूर्व बघेल की जो तल्ख प्रतिक्रिया सामने आई वह इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि सरगुजा सिंहदेव के प्रभुत्व वाला इलाका है।
टीएस सिंहदेव के द्वारा इस बात को हवा देने की जो टाइमिंग है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि 17 दिसंबर को भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को 2 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इसका जश्न मनाने की तैयारियां भी चल रही हैं। अचानक आए इस बयान को जश्न में खलल के रूप में देखा गया और वह सुर्खियों में रहा।दूसरी तरफ, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने ढाई-ढाई साल कार्यकाल के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहाकि सब कुछ हाईकमान पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ लिखित में नहीं होता है। इस पर रायपुर के माना विमानतल पर मुख्यमंत्री बघेल ने सख्त लहजे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश के विकास को देखते हुए जिन्हें तकलीफ हो रही है, वे गलतफहमी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अभी आपसे बात करते मुझे हाईकमान से फोन आ जाए तो मैं यहीं से वापस हो जाऊंगा और राज्यपाल को इस्तीफा दे दूंगा। बघेल ने कहा कि हाईकमान के कहने पर उन्होंने इस पद की जिम्मेदारी ली है। उन्हें पद का मोह नहीं है जनादेश पांच साल का मिला है। ऐसे में अगर कोई गलतफहमी पैदा करने की कोशिश कर रहा है, तो वह सचेत रहे। ऐसे लोग प्रदेश का विकास होते नहीं देखना चाहते हैं। बघेल का यह भी कहना था कि जो लोग बात का बतंगड़ बना रहे हैं वे छत्तीसगढ़ में हो रहे विकास के साथ ठीक नहीं कर रहे हैं। यहां उनका इशारा भाजपा नेताओं की ओर था जिन्होंने फौरन प्रतिक्रिया दी थी। वैसे भी यहां के सत्ता साकेत के शांत जल में पत्थर उछाल कर जिस प्रकार की लहरें पैदा करने की कोशिश की गई थी वह अधिक परवान नहीं चढ़ पाई, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने इसका तत्काल खंडन भी करवा दिया। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने हाथ आए इस अवसर को लपकते हुए कह दिया कि जिस प्रकार से ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री की बातें चल रही है उसको लेकर कांग्रेस हाईकमान को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए क्या इस प्रकार का कोई को फॉर्मूला था भी या नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राजा साहब कह रहे हैं तो सही होगा क्योंकि वह हमेशा सही बात कहते हैं। कांग्रेस सांसद प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने साफतौर पर कहा कि ढाई-ढाई साल वाले फार्मूले की बात पूरी तरह से बकवास है और ऐसा कोई फार्मूला था ही नहीं। भूपेश बघेल पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
प्रदेश की राजनीति में गर्माहट तब आई जब स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव ने बिलासपुर में एक समारोह में दुअर्थी बयान दिया। उनके बयान के बाद अफवाह फैली की छत्तीसगढ में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। भाजपा ने भी इस खबर को हाथोंहाथ ले लिया। वास्तव में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई-ढाई साल का कार्यकाल बांटा है। इसके मुताबिक, पहले ढाई साल भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री रहना है और आखिरी ढाई साल टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे। जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया तो सफाई देते हुए स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि इसमें मीडिया का जो सवाल था मुख्यमंत्री के कार्यकाल को लेकर उस पर कहा था कि आलाकमान की इच्छा पर निर्भर करता है। मुख्यमंत्री दो दिन के भी हुए हैं और 15 साल के भी। यह सब आलाकमान तय करता है कि मुख्यमंत्री का कार्यकाल क्या होगा। मैंने तो अर्जुन सिंह का एक कार्यकाल 2 दिन का देखा था और फिर 15 साल का भी एक कार्यकाल मुख्यमंत्री का देखा है। उनका इशारा रमन सिंह की ओर था जो लगातार 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। प्रदेश में इस तरह की चर्चाओं से भूपेश बघेल सरकार में गलतफहमियां बढ़ने का अंदेशा बढ़ता जा रहा था, जिसका उद्देश्य राज्य में नेतृत्व को लेकर अस्थिरता पैदा करना है। मुख्यमंत्री सरगुजा दौरे पर रहे जबकि उसी इलाके के दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव उनके साथ न होकर दिल्ली जा पहुंच गए थे।
और अंत में…………
छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को लेकर विपक्ष भी हमलावर हो गया है। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा है कि जो मुख्यमंत्री पद को स्थिर नहीं रख पा रहा है, वो सुशासन को कैसे स्थिर रख पाएगा। शायद यही कारण रहा जो कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पुनिया को फार्मूले की बात को ही बकवास निरूपित करना पड़ा।

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