दुर्ग/ फसल को प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीटव्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से कृषकों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रारंभ की गई है, जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू है, जिसमें फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर 2020 निर्धारित है।
कृषि विभाग के उपसंचालक श्री राजपूत ने बताया कि अधिकाधिक कृषकों को फसल बीमा आवरण में लाने हेतु विभाग द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के मैदानी अमलों द्वारा कृषक चौपाल, संगोष्ठी आदि माध्यमों से ऋणी एवं अऋणी कृषकों को फसल बीमा कराने की समझाईश दी जा रही है। इसी क्रम में प्रचार अभियान को व्यापक गति देने हेतु उप संचालक कृषि द्वारा प्रचार रथ रवाना किया गया है जो कि जिले के फसल बीमा हेतु अधिसूचित ग्रामों में प्रति दिवस निर्धारित कार्यक्रम अनुसार पहुंच कर अधिकतम कृषकों को योजना से जोडने हेतु प्रेरित किया जायेगा।
फसल बीमा के मुख्य बिन्दु
1.आवरण किये जाने वाले किसानः- अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी किसान।
अनिवार्य आवरणः- अधिसूचित क्षेत्र व फसल के सभी ऋणी किसान जिनके लिये वित्तीय संस्थाओं से अंतिम तिथि या उनके पूर्व ऋण सीमा स्वीकृत व नवीनीकृत की गई हो साथ ही ऐसे कृषक जिन्होने विकल्प चयन (ऑप्ट आउट ) प्रमाण पत्र वित्तीय संस्था को नहीं दिया हो
स्वेच्छिक आवरण- अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी अऋणी कृषक।
अधिसूचित फसलेंः- चना, गेहूं सिंचित, गेहूं असिंचित, राई-सरसों ग्राम स्तर पर।
बीमा जोखिम का आच्छादनः- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत निम्नानुसार जोखिमो बीमा आवरण उपलब्ध होगा।
1.    बाधित बुआई/रोपण जोखिम- विपरीत मौसम अवस्थाओं के कारण अधिसूचित क्षेत्र के 75 प्रतिशत क्षेत्र बुआई न होने पर बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति। चना फसल के लिये लागू।
2.    खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक) गैर बाधित जोखिमों यथा- सूखा, शुष्क अवधि, बाढ़, जलप्लावन, कीट व्याधि, भू-स्खलन, प्राकृतिक अग्नि दुर्घटना, आकाशीय बिजली, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी, भंवर एवं बंवडर के कारण अधिसूचित फसल में अनुमानित उपज, थ्रेसहोल्ड उपज सेे 50 प्रतिशत से कम होने की संभावना पर संभावित दावों का अधिकतम प्रतिशत का अग्रिम भुगतान, अंतिम दावों से समायोजित होगा।
3.    फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान- अधिसूचित फसलों  के कटाई उपरांत सूखने लिये खेत में  छोड़ी गई फसल को चक्रवात/चक्रवातीय वर्षा एवं बेमौसमी वर्षा से होने वाले नुकसान के लिये कटाई उपरांत अधिकतम दो सप्ताह अर्थात् 14 दिनों के लिये बीमा का प्रावधान होगा। जिस हेतु बीमा कंपनी को 72 घंटे पूर्व सूचित किया जाना आवश्यक है।
4.    स्थानीयकृत आपदाएं- अधिसूचित क्षेत्र में पृथक कृषि भूमि को प्रभावित करने वाले ओला वृष्टि, भू-स्खलन एवं जल भराव के अभिचिंहित स्थानीयकृत जोखिमों से होने वाले क्षति से सुरक्षा प्रदान करेगा। जिस हेतु बीमा कंपनी को 72 घंटे पूर्व सूचित किया जाना आवश्यक है। 5. व्यापक आधार पर आपदा- इस कारण उपज में होने वाले नुकसान का आकलन फसल कटाई प्रयोग से किया जाता है।
बीमा हेतु प्रीमियम राशि दरः- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत गेहूं सिंचित एवं गेंहू असिंचित का प्रति हेक्टर ऋणमान क्रमशः  30000 रुपये एवं रुपये है, जिसका 1.5 प्रतिशत अर्थात् कृषक द्वारा देय प्रीमियम राशि  450 रुपये  गेहूं सिंचित एवं  330 रुपये गेहूं असिंचित हेतु प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा।
इसी प्रकार कृषक द्वारा चना फसल हेतु प्रीमियम राशि  555 रुपये एवं राई-सरसों फसल हेतु 300 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा।
बीमा कराने के लिये आवश्यक दस्तावेजः- ऋणी कृषकों का बीमा संबंधित बैंक, सहकारी समिति द्वारा अनिवार्य रूप से किया जावेगा, उन्हें केवल घोषणा एवं बुवाई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अऋणी कृषकों को बैंक, सहकारी समिति एवं लोक सेवा केन्द्र में बीमा प्रस्ताव फार्म, आधारकार्ड, बैंक पासबुक, भू-स्वामित्व साक्ष्य (बी-1 पांचसाला)/किरायदार/साझेदार    कृषक का दस्तावेज, बुवाई प्रमाण पत्र एवं घोषणा पत्र प्रदाय कर बीमा करा सकते हैं।
कृषि विभाग ने किसान भाईयों से अपील की है कि निर्धारित अंतिम तिथि 15 दिसंबर 2020 के पूर्व अपने फसलों का बीमा नजदीकी/संबंधित सहकारी समिति/बैंक/बीमा प्रदायक कंपनी (एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)/लोक सेवा केन्द्र से करावें। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिये कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बैंक एवं बीमा कंपनी से सम्पर्क कर प्राप्त कर सकते है।