0 लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से खेतों में पहुंचेगा खारुन का पानी
0 217 किसानों को होगा फायदा अब खरीफ के साथ रबी के मौसम में कर सकेंगे खेती
0 100 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा निर्मित
0 सिंचाई परियोजना की शुरुआत हुई और गेहूं
0 चना लगाने के लिए खेतों को करने लगे तैयार
दुर्ग / हमारा देश और प्रदेश खेती किसानी के लिए ही जाना जाता है। हमारे अन्नदाता ही हैं जो देश को अपने कंधे पर उठाए हुए हैं। सुबह की चाय से शुरू होकर दिन भर अन्न का हर एक दाना जो हम खाते हैं इन्हीं किसानों की देन है।यदि ये कहा जाए कि इन्हीं की मेहनत के बदौलत देश हमारा नित नए कीर्तिमान स्थापित कर ही रहा है तो अतिश्योक्ति न होगी क्योंकि इन किसानों के उपजाए अन्न की ऊर्जा ही हम सबके शरीर में दौड़ रही है। अगर अन्नदाता के खेतों को पानी न मिले तो सोचिए क्या होगा।
लेकिन खेती की पहली जरूरत होती है पानी कहते हैं पानी बिना सब सून कुछ ऐसी ही कहानी थी। पाटन विकासखंड के बोरेन्दा गांव की। किसान केवल खरीफ के मौसम में फसल ले पाते थे। यहां पर सिंचाई पूर्ण रूप से वर्षा आधारित हुआ करती थी। किसान चाह कर भी रबी मौसम में कोई फसल नहीं ले पाते थ। अपने खेतों को सूखा देखने पर विवश अन्नदाता को उम्मीद की किरण दिखाई सौर सामुदायिक सिंचाई परियोजना ने बीते 9 नवंबर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बोरेन्दा गांव में 3 करोड़ 30 लाख रुपए की लागत से लिफ्ट इरिगेशन पर आधारित सौर सामुदायिक सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना के षुरू होने से किसानों को एक नई उम्मीद मिली है। लिफ्ट इरिगेषन सिस्टम पर आधारित इस परियोजना से 100 हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा निर्मित हुई है, इस योजना से क्षेत्र के 217 किसानों को फायदा पहुंचेगा।
बोरेन्दा के किसान इसलिए भी खुष हैं क्योंकि अब उन्हें खेती के लिए बारिष की बाट नहीं जोहनी पड़ेगी और 12 महीने उनकी फसलों को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
किसान बताते हैं अब परियोजना षुरू हो गई है इसलिए उन्होंने अपने खेतों को रबी फसल लेने के लिए तैयार करना षुरू कर दिया है। बोरेन्दा के साथ इस साल रबी के सीजन में गेहूं चना इत्यादि की फसलें ले सकेंगे ।
पहले अपने खेत तक पानी लाने के लिए 495 नग पाइप लग जाते थे। जिसका खर्च भी बहुत आता था। अब किसानों को बिना परेशानी मिलेगा भरपूर पानी- बोरेन्दा के सरपंच टुमेश्वर साहू बताते हैं कि नदी के किनारे होने के बाद भी बोरेन्दा के किसान के खेत इसलिए सूखे रह जाते थे। बोर कराने के बाद भी पानी नहीं निकलता था। इसलिए किसान पाइप लाइन बिछाकर पानी ले जाते थे। 400 से 500 नग तक पाइप लग जाते थे। जिस पर किसान का काफी खर्च हो जाता था। इस परियोजना के शुरू हो जाने से किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त में भरपूर पानी मिल सकेगा। सरपंच ने सभी किसानों की ओर से मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और क्रेडा विभाग का आभार व्यक्त किया।
वर्षा पर ही निर्भर थे खरीफ की फसल भी पानी की कमी से कई बार पक नहीं पाती थी और रबी में तो कोई फसल नहीं होती थी, किसानों को लंबे समय से था इंतजार, इस परियोजना से मिली है उम्मीद – किसान ईश्वर लाल बताते हैं कि पहले खेतों में पानी पहुंचाने में बड़ी मशक्कत होती थी। कई किसान तो हिम्मत ही नहीं कर पाते थे। पाइपलाइन बिछाकर पानी की व्यवस्था करें क्योंकि खर्च भी लगता है। कई बार तो फसल भी ठीक से पक नहीं पाती थी। 9 नवंबर को जाव इस परियोजना का शुभारंभ हुआ तो किसानों के जीवन मे नई उम्मीद जगी है। बहुत वर्षों के प्रयास के बाद आज ये दिन देखने को मिला है। जिसके लिए वे छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का आभार व्यक्त करते हैं।
लाखों रुपए खर्च करनेबके बाद भी बोर में नहीं निकलता था पानी,इसलिए किसान बसंत साहू ने किसानों के लिए कुछ ठोस पहल करने की ठानी- इस परियोजना के लिए सभी किसान बसंत साहू का बहुत आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि गाँव के किसान यही मानते हैं कि बसंत साहू का बहुत बड़ा योगदान है। बसंत साहू पिछले 5 सालों से क्रेडा में तकनीशियन के रूप में काम जर रहे हैं, साथ ही इनकी खुद की भी खेती है। अपने खेतों में बोर खुदवाने के लिए 4 से 5 बार कोशिश कर चुके हैं। लेकिन इलाके की भूगर्भीय संरचना ऐसी है की पानी मिलता ही नहीं जमीन के अंदर चट्टाने ही मिलीं। एक बोर खुदवाने में कम से कम 30 से 35 हजार खर्च होते हैं, उनके करीब डेढ़ लाख खर्च हुए मगर सारी कोशिश बेकार गई।
किसान बसंत साहू बताते हैं कि लंबे समय से किसानों की परेशानी देख रहे हैं। वो हमेशा यही सोचा करते थे। कैसे हम किसानों का दुख दूर हो। काफी दौड़भाग भी की। जब उनकी नौकरी क्रेडा विभाग में तकनीशियन के रूप में लगी तब से वो कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पहले यह क्षेत्र को सौर सामुदायिक परियोजना में शामिल नहीं था। जैसे ही शासन की ओर से प्रोजेक्ट अप्रूव हुआ तो सारे किसानों के साथ मिलकर औपचारिकता पूरी की। आज उनको उनके प्रयासों का फल मिल गया है। अपने सपनो को अपनी आंखों के सामने सच होता देखने की खुशी और संतुष्टि बरबस ही उनके चेहरे पर नजर आने लगती है।
‘‘पहिली खरीफ म धान लुवन अलवा जलवा अउ रबी में जमीन रहय सुक्खा
अब मोटर पम्प लग गए हे त पानी मिलही दलहन तिलहन बोवत हन अब हमर जमीन खालीच नइ रहय’’
